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एक-दो नहीं, पाकिस्तान के कुल चार टुकड़े होंगे!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर का जिक्र करके सारे समीकरणों को उलट-पुलट दिया है। पहली बार अब कश्मीर मुद्दा नहीं, बल्कि पाकिस्तान का सवाल बड़ा हो गया है। बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई के साथ ही पाकिस्तान लगभग हर राज्य में आजादी की मांग सिर उठाने लगी है। बलूचिस्तान और पीओके के अलावा सिंध, खैबर पख्तून और बाल्टिस्तान से भी आजादी की मांग उठने लगी है। दरअसल पंजाब सूबे को छोड़कर सभी राज्य पाकिस्तान से अलग होने की लड़ाई लड़ रहे हैं। एक नज़र उन चार राज्यों पर जो पाकिस्तान से अलग देश बनना चाहते हैं।

1. सिंध, दमन के खिलाफ गुस्सा

पाकिस्तान का 70 फीसदी टैक्स सिंध प्रांत से आता है। सिंध में ही सबसे ज्यादा कच्चे तेल और नेचुरल गैस का उत्पादन होता है। इसके बावजूद यह पाकिस्तान के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है। बंटवारे के वक्त सिंध के लोगों ने खुद ही पाकिस्तान में शामिल होने का समर्थन किया था। लेकिन इसके बाद से पाकिस्तान ने जिस तरह से यहां के लोगों का दमन किया है उससे उनका मोहभंग हो गया। इस साल 14 अगस्त को पाकिस्तानी आजादी को सिंध के लोगों ने काला दिवस के तौर पर मनाया। जीये सिंध मुत्ताहिदा महाज (JSMM) नाम का एक संगठन बीते काफी वक्त से अपनी जमीन की आजादी के लिए लड़ रहा है। दूसरे देशों में बसे सिंध के लोग भी समय-समय पर विरोध-प्रदर्शन करके अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करते हैं। नीचे की यह तस्वीर 14 अगस्त को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में मनाए गए काला दिवस के मौके की है। इसकी अगुवाई संगठन के चेयरमैन शफी मुहम्मद बरफात ने की।

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सिंध लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को पैसे और मदद देकर इस इलाके में इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। ऐतिहासिक रूप से सिंध लोग सेकुलर सोच वाले माने जाते रहे हैं। लेकिन अब उन्हें कट्टरपंथ की तरफ मोड़ने की कोशिश हो रही है। इसका विरोध करने वाले कई सिंधी लोगों को अगवा करके उनकी हत्या हो चुकी हैं। इन सबमें पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम सामने आता है।

2. बलूचिस्तान, बंटवारे के वक्त से मांग

बलूचिस्तान का संघर्ष सिंध से भी कहीं अधिक पुराना है। यहां आए दिन पाकिस्तान के खिलाफ आंदोलन और आजादी के लिए प्रदर्शन होते रहते हैं। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ यहां अलगाववाद को हवा देती है। लेकिन आजतक वो इसके पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर सके हैं। बलोच नेता नायला कादरी के मुताबकि “रॉ की बलूचिस्तान में कोई दखल नहीं है। हम 1947 के पहले से अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। पाकिस्तान रॉ पर आरोप लगाकर यहां के असली मुद्दों से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।” बंटवारे के वक्त भी बलूचिस्तान ने अलग देश बनने की मांग की थी। लेकिन तब पाकिस्तान ने सेना भेजकर इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। आंदोलन के चलते पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को विकास की मुख्य धारा से पूरी तरह काट रखा है। बीते 60-70 साल में यहां हजारों बलूच कार्यकर्ताओं की अपहरण करके हत्या की जा चुकी है। बलूच लोगों के संघर्ष के कई वीडियो यूट्यूब पर भी देखे जा सकते हैं। पाकिस्तान की आजादी के दिन को यहां के लोगों ने काला दिवस के तौर पर मनाया था। इसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।

3. फाटा, कबायलियों का देश

ये पाकिस्तान का उत्तरी-पश्चिमी इलाका है, जिसे फेडरली एडमिनिस्ट्रेटेड ट्राइबल एरिया यानी FATA कहा जाता है। इस इलाके में पाकिस्तानी सेना तालिबान के साथ काफी समय से लड़ाई लड़ रही है। इन आदिवासी इलाकों के लोगों ने कभी भी पाकिस्तान का अधिपत्य स्वीकार नहीं किया। अफगानिस्तान से करीबी होने की वजह से यह इलाका वहां के कट्टरपंथी संगठनों के प्रभाव में हमेशा से रहा है। फिलहाल पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के चलते इलाके में इस्लामाबाद को लेकर भारी गुस्सा है।

4. पाक कब्जे वाला कश्मीर

एलओसी के इस पार कश्मीर में भले ही पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगते हों, लेकिन दूसरी तरफ के कश्मीर में हालात बिल्कुल अलग हैं। मुजफ्फराबाद और गिलगित समेत यहां के तमाम इलाकों में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन और नारेबाजी आम बात है। पिछले दिनों इस इलाके में चुनाव हुए थे, जिसमें नवाज शरीफ की पार्टी की जीत घोषित हुई थी। यहां के लोगों का कहना है कि ये बोगस चुनाव थे और लोगों के सही वोटों की गिनती ही नहीं की गई। इसके बाद से पूरा इलाका हिंसा की चपेट में है। लोगों की मांग है कि पाकिस्तानी सेना को इस इलाके से हटाया जाए। शुरुआत में यहां पर पाकिस्तान समर्थक लोगों की अच्छी खासी तादाद थी, लेकिन बीते कुछ सालों में पीओके की नई पीढ़ी यह महसूस करने लगी है कि अगर वो भारत का हिस्सा होते तो यह उनके भविष्य के लिए अच्छा होता। कश्मीर में आई बाढ़ और भूकंप के वक्त भी भारत की तरफ के इलाकों में राहत कार्य बहुत अच्छे तरीके से हुए थे, जबकि पाकिस्तान के इलाके में लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था।

दरअसल पाकिस्तान की राजनीति में वहां के पंजाब प्रांत का कब्जा रहा है। इसे लेकर बाकी देश में नाराजगी देखने को मिलती है। लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं और रोज-रोज आतंकवादी हमले हो रहे हैं। एक देश के तौर पर पाकिस्तान से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है।

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