पाकिस्तान में अत्याचार के खिलाफ हिंदुओं की ‘बगावत’

पाकिस्तान में मुसलमानों के अत्याचार के खिलाफ पहली बार अल्पसंख्यक हिंदुओं ने आवाज़ बुलंद की है। कराची समेत कई शहरों में हिंदुओं ने विरोध-प्रदर्शन आयोजित करके दुनिया तक अपना दर्द पहुंचाने की कोशिश की है। सिख, ईसाई और अहमदिया समुदाय के लोगों ने भी इस लड़ाई में हिंदुओं का साथ देने का एलान किया है। इस प्रदर्शन में कई पीड़ित परिवारों और उनकी महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। दरअसल पिछले कुछ दिनों में हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनको जबरन मुसलमान बनाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा आए दिन हिंदुओं पर हमले और हत्याएं भी हो रही हैं। इस तरह की तमाम वारदात में मियां मिट्ठू नाम के एक मौलवी का जिक्र होता है। लेकिन अब तक पाकिस्तान सरकार ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मियां मिट्ठू का असली नाम पीर अब्दुल हक़ है और वो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का नेता भी है। 11 अगस्त को कराची में हुए प्रदर्शनों के वीडियो आप नीचे लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।

देखिए पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है

पाक में हिंदुओं की हालत पर अमेरिकी मीडिया की नज़र भी गई है। पहली बार मानवाधिकार संस्थाओं ने पाकिस्तान के अंदर हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे जुल्म की कहानियां दिखाई हैं। नीचे के लिंक पर क्लिक करके आप ऐसी ही एक खबर देख सकते हैं।

पाकिस्तान में पिछले कुछ हफ्तों में अकेले कराची में हिंदुओं पर हमले के कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 6 अगस्त को एक लड़के की हत्या और एक डॉक्टर को गोली मारने की घटनाएं शामिल हैं। 11 अगस्त को पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता और हिंदू समुदाय के लोग कराची, लाहौर जैसे शहरों में इकट्ठा हुए थे। इन लोगों ने पीर अब्दुल हक़ उर्फ मिट्ठू मियां के खिलाफ नारे लगाए और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जबरन धर्मांतरण और शादी का रैकेट

पीर अब्दुल हक़ पूरे सिंध इलाके में हिंदुओं और दूसरे धर्म के लोगों को जबरन अगवा करवाने और उनका धर्मांतरण करवाने के लिए कुख्यात है। पाकिस्तान में सबसे ज्यादा करीब 90% हिंदू सिंध प्रांत में ही रहते हैं। मियां मिट्ठू के आतंक की वजह से ही पिछले कुछ साल में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी हिंदू अपना घर-बार छोड़कर भारत आने को मजबूर हो गए। मिट्ठू मियां उन मुसलमान लड़कों को प्रोटेक्शन देता है जो हिंदू लड़कियों को अगवा करते हैं। ऐसा करने वालों को इनाम में काफी रकम भी दी जाती है। इन लोगों का टारगेट खास तौर पर 18 साल से कम उम्र की लड़कियां होती हैं। अगवा होने के बाद लड़कियों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है और किडनैपर से ही उसका निकाह करवा दिया जाता है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। मिट्ठू मियां की दहशत का आलम यह है कि सिंध प्रांत के लोग उसके खिलाफ आवाज़ उठाने से भी डरते हैं।

पाकिस्तानी हिंदुओं की इंसाफ की लड़ाई

Dr.-Ramesh-Kumar-Vankwani-MNAपाकिस्तान में पीएमएल (नवाज) के हिंदू सांसद रमेश कुमार वंकवानी ने पिछले कुछ वक्त में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट किया है। पाकिस्तान हिंदू कौंसिल के बैनर तले इन लोगों ने अपनी लड़ाई खुलकर लड़ने का फैसला किया है। इन्हीं लोगों की पहल पर 11 अगस्त के दिन पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन किए गए। इन लोगों की मांग है कि पाकिस्तान में धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाया जाए ताकि कोई मुल्ला उनकी बहन-बेटियों को इस तरह अगवा करके धर्मांतरण न करवा सके।

पाकिस्तान में आजादी के बाद से हिंदुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। अभी एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में 80 लाख के करीब हिंदू रहते हैं। इनमें से ज्यादातर बेहद गरीब हैं। ऊपर से मुस्लिम कट्टरपंथियों के अत्याचारों ने उनकी जिंदगी और भी मुश्किल कर रखी है।

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