शरणार्थी बनकर आए थे, अब शरिया कानून चाहते हैं!

अब जर्मनी में भी इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ आवाज़ उठने लगी है। खाड़ी देशों में लड़ाई की वजह से भाग कर आने वालों के लिए जर्मनी ने अपने दरवाजे खोल दिए थे, लेकिन ऐसा करना उस पर भारी पड़ रहा है। बीते 10 दिन में जर्मनी में तीन आतंकी हमले हो चुके हैं। जिसकी वजह से स्थानीय लोगों में बेहद नाराजगी देखने को मिल रही है। जर्मनी की क्रिश्चियन सोशल यूनियन पार्टी (CSU) के नेता थॉमस जॉन ने कहा है कि मुसलमान शरणार्थियों की वजह से लोगों में डर है। उन्होंने इन हालात के लिए यूरोपीय यूनियन और जर्मन सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

मुसीबत बन गए मुस्लिम शरणार्थी

जर्मनी में इस साल एक के बाद एक कई छोटे-बड़े आतंकवादी हमले हो चुके हैं। आए दिन दंगे और मारपीट आम बात है। जर्मनी के बेहद शांत समझे जाने वाले इलाकों में लूटपाट जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। दरअसल सीरिया की लड़ाई के दौरान लाखों की तादाद में शरणार्थी यहां पर आए हैं। यूरोप में जर्मनी ही एक मात्र देश था, जिसने सबसे ज्यादा लोगों को अपने यहां शरण दी। चांसलर एंगेला मर्केल ने मानवता के आधार पर यह फैसला किया था, लेकिन इन मुसलमान शरणार्थियों ने जर्मनों का एहसान मानने के बजाय वो सारे काम शुरू कर दिए जिसके लिए उनकी दुनिया भर में पहचान है। यहां पर मुस्लिम शरणार्थियों के कई कट्टरपंथी संगठन शुरू हो चुके हैं जो जर्मनी में शरीयत कानून लागू करने की मांग भी करने लगे हैं। ये हालत तब है जब खुद सऊदी अरब और खाड़ी के दूसरे तमाम मुस्लिम देशों ने मुसलमान होने के बावजूद इन्हें अपने यहां शरण नहीं दी थी।

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महिलाओं से छेड़खानी, पुलिस पर हमले बढ़े

सिर्फ कुछ महीने पहले तक भिखारी बनकर आए मुस्लिम शरणार्थियों ने जर्मनी में अपनी छोटी-छोटी बस्तियां बसा ली हैं। ये लोग आए दिन महिलाओं से छेड़खानी और पुलिस पर हमले करते रहते हैं। कुछ इलाकों में सार्वजनिक जगहों पर ‘अल्ला हू अकबर’ के नारे आम बात हो चुके हैं। थॉमस जॉन ने मांग की है कि इन शरणार्थियों को वापस भेजने का इंतजाम किया जाए क्योंकि ये जर्मन लोगों के टैक्स के पैसे पर आतंकवाद और अव्यवस्था फैला रहे हैं। अब तक जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उनमें कहीं न कहीं इन्हीं लोगों का हाथ पाया गया है। जर्मन के विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब भी इन कट्टरपंथियों पर कोई कार्रवाई की जाती है ये फौरन अपनी महिलाओं और बच्चों को आगे कर देते हैं। खुद ही इसकी तस्वीरें दुनिया भर में फैला देते हैं कि उन पर कितना अत्याचार हो रहा है। इससे दुनिया भर में जर्मन पुलिस की छवि भी खराब हो रही है।

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