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टीवी एंकर कब्ज का मारा और एक दर्शक बेचारा

यह तस्वीर एंकर महोदय के पिछले चैनल की है। नई तस्वीर इसलिए नहीं लगा रहे हैं क्योंकि इससे उनके कार्यक्रम का प्रचार होने की आशंका है।

 

tarun kumar tarun
तरुण कुमार तरुण

पहले ज़ी न्यूज़ पर थे, अभी आईबीएन-7 पर हैं। थोड़ी देर पहले टीवी देखते-देखते मीठी गुनगुनी नींद आंखों में उतर आई। ढीले पड़ गये, हाथ से रिमोट छूट गया। नींद की सुकूनदायी जद में 20 मिनट भी नहीं रहा होऊंगा कि अचानक एक आवाज ने झकझोर दिया। ऐसा लगा जैसे कोई मेरे बिस्तरे पर अचानक उछलकर आ बैठा है और मेरे कान में अपना भोंपू थूथना घुसेड़कर ‘कश्मीर-कश्मीर’ चिल्ला रहा है। नींद चाक हुई तो सामने टीवी पर आईएबीएन वाले अमिष देवगन असीम और अथाह रेंज तक मुंह फाड़ फाड़कर “आर-पार” चला रहे थे।

 

भन्नाए हुए मन ने सवाल किया, “ई ससुरा सुबह-सुबह घर से क्या खाकर निकलता है? क्या नाश्ते में ही बकरे के साथ दो बोतल ठर्रा भी लगा लेता है? क्या आफिस पहुंचते ही साथियों से पटका-पटकी कर लेता है? या फिर घर से भाभीजी से लड़कर चलता है या फिर इस आदमी को पूरे देश से कोई शिकायत है या फिर रक्तचाप, कब्जियत, खुजली, गैस्ट्रिक, एसिडिटी सबने एक साथ असर छोड़ रखा है?

जनाब आप पब्लिक पर रहम करें

कार्यक्रम में पैनलिस्टों को अपनी बेलगाम चिल्लाहट का इंजेक्शन ठोंककर लगभग बेसुध रखता है! थकेले वक्ताओं को चुन-चुनकर जुटाता है और लगता है जैसे उसने अपनी कानफाड़ू आवाज से इन्हें स्टूडियो में ही अधमरा कर देने की सुपारी अपने प्रबंधन से ले रखी है। मुंह तो इतना फटता है कि दस आशुतोष का फटा हुआ मुंह समा जाए! सिर्फ असंयमित हंगामा और वह भी सांस खींचकर “वहां” के पूरे दम के साथ! टीआरपी का दबाव पूरे गर्दन तक। हिंदी का अर्णव गोस्वामी बन जाने का भूत माथे पर!

लगता है उनके शूट, पैंट, बनियान, जांघिये में खूंखार खटमलों ने अड्डा बना रखा है। पेशाब और संडास रोककर एंकरिंग! पूरी छटपटाहट और बेसब्री से भरी स्टूडियो-हिलाऊ एंकरिंग। लगता है अपनी चनचनाती चिल्लाहट से टीवी के पर्दे फाड़ देंगे। कान को शोर का हैजा और उलटी कराके ही दम लेंगे! भाई साहब अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए पब्लिक की सेहत का भी ख्याल रखिए। हम जिंदा रहेंगे तो आपका चैनल भी चलेगा, हम ही निपट गये तो किसके साथ “आर-पार” कीजिएगा।

(यह लेख पूर्व पत्रकार तरुण कुमार तरुण के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)

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