जब नाग पंचमी के मौके पर पप्पू बन गए ‘पेटा’ वाले!

दुनिया भर में जानवरों के अधिकारों के नाम पर दुकान चलाने वाली इंटरनेशनल संस्था PeTA (पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) ने नाग पंचमी के मौके पर एक अपील जारी करके लोगों को हंसने का मौका दे दिया। संस्था ने लोगों से अपील की है कि वो नाग पंचमी मनाएं लेकिन नागों को घर पर ला कर न काटें। इस अपील से ही पता चलता है कि जानवरों के अधिकार के नाम पर चल रही इस संस्था को त्योहारों और परंपराओं के बारे में कितना कम पता है। फिलहाल उनकी इस अपील का सोशल मीडिया पर जमकर मज़ाक उड़ रहा है।

नागपंचमी पर बेवकूफी भरी अपील

पेटा ने अपील जारी की है कि लोग नाग पंचमी के मौके पर नागों के साथ बेरहमी न करें। जबकि सच्चाई यही है कि नाग पंचमी पर नागों की पूजा की जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि लोग नागों को अपने घरों में लाते हों। लोग नाग की नहीं, बल्कि उसकी तस्वीर की पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर मंदिरों में साक्षात नाग की पूजा जरूर होती है लेकिन वहां भी उन्हें दूध पिलाया जाता है, न कि उनकी जान ली जाती है। ये नाग भी ज्यादातर संपेरों की देखरेख में होते हैं। सवाल यह है कि ऐसी अपील जारी करके पेटा आखिर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रहा है?

हिंदू त्योहारों पर खास तौर से निशाना

पेटा की खूबी है कि वो जानवरों की रक्षा के नाम पर खासतौर पर हिंदू त्यौहारों को ही निशाना बनाती है। जलीकट्टू और दूसरे कई आदिवासी त्यौहारों पर पेटा की वजह से बंदिशें लग चुकी हैं। बकरीद के मौके पर दुनिया भर में लाखों जानवरों की हत्या की जाती है, लेकिन उस पर पेटा आम तौर पर रस्मअदायगी से ज्यादा कुछ नहीं करता। इसके अलावा चीन और यूरोप के देशों में जानवरों की हत्या के त्यौहार मनाए जाते हैं, वहां पर पेटा के कार्यकर्ता कुछ नहीं करते। पेटा शाकाहारी खाने को बढ़ावा देने का दावा करता है। भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग हैं, इसके बावजूद भारत में पेटा की सक्रियता समझ से परे है।

गायों की हत्या पर आज तक अपील नहीं

भारत में हर साल अवैध रूप से हजारों गायों की हत्या होती है। पेटा ने आजतक गायों की हत्या रोकने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया। बीफ को लेकर चल रही मौजूदा बहस से भी पेटा पूरी तरह गायब है। इसी तरह राजस्थान में चिंकारा का शिकार रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने जब आंदोलन चलाया तो कभी भी उन्हें पेटा का समर्थन नहीं मिला। फिलहाल इस इंटरनेशनल संस्था की असली नीयत को लेकर सोशल मीडिया पर आम लोग सवाल उठाने लगे हैं।

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