राहुल और केजरीवाल ‘भाई-भाई’ हैं, देखिए 5 सबूत

राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल भले ही अलग-अलग पार्टियों में हों, लेकिन दोनों की काम करने की स्टाइल में कमाल की समानताएं हैं। हम आपको बता रहे हैं वो टॉप-5 लक्षण जिससे यह साबित होता है कि राहुल और केजरीवाल ‘भाई-भाई’ हैं।

1. दोनों जमकर छुट्टियां लेते हैं

अक्सर नेताओं की शिकायत रहती है कि वो अपने पर्सनल लाइफ और परिवार के लिए वक्त नहीं निकाल पाते। लेकिन राहुल और केजरीवाल पर यह बात लागू नहीं होती। दोनों लंबी-लंबी छुट्टियां लेते रहते हैं। राहुल गांधी पर पूरी कांग्रेस पार्टी का दारोमदार है, लेकिन कब वो सबकुछ छोड़कर गायब हो जाएं कुछ पता नहीं रहता। यही स्थिति केजरीवाल की है, जो हर कुछ दिन पर विपश्यना के नाम पर पूरे 10 दिन गायब रहते हैं। इसके अलावा सर्दी-जुकाम के इलाज के नाम पर भी 10-10 दिन की छुट्टियां लेते रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद से केजरीवाल कई बार सिक लीव ले चुके हैं। फिल्में देखने और फिल्मी कलाकारों से मिलने के लिए उनके पास हमेशा वक्त रहता है।

2. सोनिया के खिलाफ कभी नहीं बोलते

राहुल गांधी का तो समझ में आता है, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से अरविंद केजरीवाल कभी भी सोनिया गांधी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलते। यहां तक कि अन्ना आंदोलन के दौरान भी उन्होंने मनमोहन सिंह पर तो हमला बोला, लेकिन सोनिया गांधी को लेकर उन्होंने कभी कोई सख्त बयान नहीं दिया। यहां तक कि सोनिया गांधी पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया। केजरीवाल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। सोनिया गांधी भी नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं। इसके बावजूद केजरीवाल ने आज तक इस मामले में एक ट्वीट तक नहीं किया।

3. सबूत और जानकारी के बिना बोलते हैं

राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, दोनों ही जब किसी पर आरोप लगाते हैं तो कोई सबूत नहीं देते। कई बार आरोप में इस्तेमाल तथ्य इतने बनावटी होते हैं कि हंसी छूट जाए। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी ने यह कला अरविंद केजरीवाल से सीखी है। बिना सबूत आरोप लगाने पर 1-2 दिन के लिए मीडिया पब्लिसिटी भी मिल जाती है। बाद में सच्चाई सामने आ भी जाए तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। यही कारण है कि दोनों ही नेता मानहानि के गंभीर मामलों में फंसे हुए हैं। राहुल गांधी आरएसएस के बारे में एक बयान की वजह से कई दिनों से कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं, वहीं केजरीवाल जेटली से लेकर गडकरी तक पर आरोप लगाकर पलटी मार चुके हैं।

4. दोनों सनकी के तौर पर जाने जाते हैं

अरविंद केजरीवाल बाहर से भले ही सीधे-सुलझे आदमी लगते हैं लेकिन पार्टी की बंद दरवाजों में होने वाली बैठकों में उनका असली रूप सामने आता है। पार्टी छोड़ चुके कई नेता आरोप लगा चुके हैं कि केजरीवाल का बर्ताव किसी सनकी तानाशाह जैसा होता है। वो अपनी ही पार्टी के नेताओं को गंदी-गंदी गालियां भी देते हैं। राहुल गांधी को भी सनकी नेता के तौर पर जाना जाता है। यही कारण है कि पार्टी के पुराने नेताओं को अपमानित करने में उन्हें बहुत मजा आता है। राहुल ने एक बार मनमोहन सरकार का पास किया अध्यादेश भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़ दिया था। असम कांग्रेस के नेता रहे हेमंत बिस्वा शर्मा ने एक बार बताया था कि कैसे जब वो राहुल से मिले तो उन्होंने एक बार भी उनकी तरफ नहीं देखा और अपने कुत्ते को बिस्कुट खिलाते रहे।

5. मौके पर भागने में एक्सपर्ट हैं दोनों

राहुल और केजरीवाल दोनों पर भगोड़ा होने के आरोप लगते हैं। यूपीए सरकार के दौर में जब-जब कोई संकट आता था राहुल विदेश भाग जाते थे। पिछले साल तो वो संसद सत्र के दौरान देश छोड़कर अचानक चले गए। कांग्रेस पार्टी जब-जब किसी मुश्किल में होती है, राहुल कोई न कोई बहाना बनाकर देश से बाहर चले जाते हैं। यही हालत केजरीवाल की है। दिल्ली सरकार के अधिकारों पर हाई कोर्ट का फैसला आने से ठीक एक दिन पहले वो छुट्टी पर निकल लिए। दूसरी तरफ पंजाब में आम आदमी पार्टी में बगावत के हालात हैं। माना जा रहा है कि केजरीवाल के विपश्यना पर जाने की एक वजह यह भी है।

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