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बुलंदशहर के बलात्कारी को भी दलित-शोषित माना जाए?

वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार की फेसबुक वॉल से साभार
माननीय मुलायम सिंह यादव से पूछो कि जो बुलंदशहर में हुआ है, वह गैंगरेप की श्रेणी में आता है कि नहीं?
जब माननीय मुलायम सिंह गैंगरेप की पुष्टि कर दें, तब पूर्व बहनजी एवं वर्तमान देवीजी मायावती से भी पूछो कि बुलंदशहर में हुआ गैंगरेप अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं?
जब इन दोनों से जवाब मिल जाए, तब आजम खान से भी पूछ लो कि आपकी भैंस मिल गई है कि नहीं? अगर उनकी भैंस मिल गई हो, तो कोई कुत्ता-बकरा इत्यादि तो नहीं खो गया? अगर उनका कुछ न खोया हो, तभी पुलिस को काम पर लगाना।
लेकिन पुलिस को काम पर लगाने से पहले उसे सख्त हिदायत दे देना कि अगर अपराधी ख़ास जातियों अथवा सम्प्रदायों के हुए तो एक बार माननीय अखिलेश यादव से भी पूछ लेना कि पकड़ें कि नहीं?
सबसे पूछ लेने के बाद एक बार जेएनयू के महिषासुरों से भी पूछ लेना कि अपराधी कहीं उनके साले-बहनोई इत्यादि किस्म के रिश्तेदार तो नहीं थे?
कहने का मतलब यह कि कोई भी एक्शन लेना भैया, तो सबसे पूछ ताछ कर। वरना क्या पता किसी दलित-शोषित-पीड़ित पर अत्याचार न हो जाए!

बैकग्राउंड: क्या है बुलंदशहर गैंगरेप का मामला?

यूपी के बुलंदशहर में नेशनल हाइवे 91 पर शनिवार शाम कुछ अपराधियों ने कार से जा रहे गाजियाबाद के एक परिवार को निशाना बनाया था। बदमाशों ने पहले परिवार के पुरुषों को रस्सी से बांध दिया और फिर मां और उनकी 13 साल की बेटी के साथ गैंगरेप किया। इसके बाद बदमाश सारा सामान लेकर आराम से भाग गए। परिवार ने 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बुलाने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने फोन नहीं उठाया। अब तक तीन आरोपी पकड़े गए हैं, जिनमें से दो मुसलमान हैं। बाकी एक अनुसूचित जाति के बताए जा रहे हैं। यूपी सरकार ने घटना के बाद पीड़ित परिवार की दोनों महिलाओं को 50-50 हजार की दर से एक लाख रुपये का मुआवजा भिजवा दिया। सवाल उठ रहा है कि दादरी में गो हत्या करने वाले अखलाक के परिवार को यही यूपी सरकार 3 फ्लैट और 45 लाख रुपये मुआवजा देती है और अपने निकम्मेपन की शिकार एक मां और उनकी अबोध बेटी को मुआवजे के नाम पर रेवड़ी दी जा रही है। यूपी के जिहादी मंत्री आजम खान ने यह कहकर कि इस कांड के पीछे कोई सियासी साजिश है, लोगों का गुस्सा और भी भड़का दिया है।
सोशल मीडिया पर इस पूरे वाकये को लेकर जबर्दस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है। देखिए कुछ लोगों की फेसबुक पोस्ट।

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