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हैंडलूम की बिक्री बढ़ेगी तो फायदा किसको होगा?

देश भर में आम लोगों ने आज पूरे जोर-शोर से हैंडलूम दिवस मनाया। यह पहली बार है जब हैंडलूम को एक स्टाइल स्टेटमेंट के तौर पर दिखाने की इतने बड़े पैमाने पर कोशिश हुई। कपड़ा मंत्रालय ने लोगों से अपील की थी कि वो आज हैंडलूम के कपड़े ही पहनें और इसकी फोटो खिंचवा कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करें। नतीजा यह कि दिन भर #IWearHandloom ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई मंत्रियों और जानी-मानी हस्तियों ने हैंडलूम के कपड़ों में अपनी तस्वीरें शेयर कीं।

हैंडलूम दिवस किसके फायदे के लिए?

सवाल यह है कि हथकरघा उद्योग अगर फलता-फूलता है तो इसमें किसका भला होगा? इस काम में सबसे ज्यादा मुस्लिम और पिछड़े तबकों के लोग लगे हैं। बीते कुछ सालों में यह उद्योग मौत के कगार पर पहुंच चुका था। जिसकी वजह से बड़ी तादाद में कारीगर और कारोबारियों की रोजी-रोटी छिनने की नौबत आ गई थी। बीते 2 साल में नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरह से हथकरघा को प्रमोट किया है उसकी वजह से दुनिया भर में इसकी डिमांड बढ़ी है। पिछले साल से ही पहली बार हैंडलूम दिवस मनाने का काम शुरू हुआ है। इसके बाद से इन प्रोडक्ट्स की बिक्री में भारी उछाल आया है। घरेलू बाजार के मुकाबले विदेशी बाजारों में तो ये बढ़ोतरी कई गुना ज्यादा है।

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कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने सुषमा स्वराज और मेनका गांधी के साथ हैंडलूम की पोशाक में अपनी यह तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की।

इंडिया हैंडलूम ब्रांड से बदलेगी किस्मत!

दरअसल मेक इन इंडिया के तहत सरकार अब हथकरघा उद्योग पर फोकस कर रही है। ये वो क्षेत्र है, जिसमें देश में खेती के बाद सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। भारतीय हैंडलूम इंडस्ट्री ऐसी है जिसका दुनिया में किसी से कोई कंपिटीशन नहीं है। मतलब ये कि अगर आप इसकी सही मार्केटिंग करें तो अरबों डॉलर का बाजार खुला पड़ा है। सरकार ने खादी की तर्ज पर ‘इंडिया हैंडलूम’ ब्रांड लॉन्च भी किया था। इसके तहत देशभर के अलग-अलग राज्यों में दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले कारीगरों के बनाए कपड़ों, चमड़े, बांस, हैंडमेड पेपर, लकड़ी के सामान को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से तैयार करवाया जाएगा। इसके तहत अभी करीब 40 सामान की लिस्ट तैयार की गई है। टेक्सटाइल मंत्रालय इन सामान की क्वालिटी पर नज़र रखेगा और इन पर ‘इंडिया हैंडलूम’ का लेबल लगा दिया जाएगा। कंपनियां सीधे कारीगरों से सामान बनवाएंगी, लेकिन उन पर मुहर ‘इंडिया हैंडलूम’ की होगी। कारीगरों को सरकार की तरफ से तय न्यूनतम कीमत चुकाना होगा।

मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक

आपको शायद याद होगा कि लोकसभा चुनाव के वक्त अपने भाषणों में नरेंद्र मोदी अक्सर ‘फाइबर टु फैब्रिक टु फैशन’ (Fiber to Fabric to Fashion) का नारा दिया करते थे। इसका मतलब था कि भारत में कपास उगाओ, उससे यहीं पर धागा और कपड़ा बनाओ और फिर देश में ही मौजूद कारीगरों और डिजाइनरों की मदद से वर्ल्ड क्लास का सामान तैयार करवाओ। दुनिया के बाजार में इसकी ऊंची कीमत मिलेगी। सरकार क्वालिटी कंट्रोल करेगी और कंपनियों की भूमिका मार्केटिंग प्लेटफॉर्म की तरह होगी। आप खुद समझ सकते हैं कि यह कदम पूरे देश में गरीबी की जिंदगी जी रहे करोड़ों शिल्पकारों और कारीगरों की जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।

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पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया हैंडलूम ब्रांड का लोगो लॉन्च किया था।
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