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सामने आ रहा है ऊना में दलितों की पिटाई का सच

गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई के मामले में साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। ताजा जानकारी यह है कि पहली बार दलित परिवार ने खुलकर आरोप लगाया है कि गांव के सरपंच प्रफुल कोराट ने ही उनकी पिटाई करवाई थी। यह सरपंच लोकल कांग्रेस विधायक का करीबी है। गिरफ्तारी के डर से सरपंच फरार हो गया है। मामले की जांच कर रही गुजरात सीआईडी ने सरपंच के मोबाइल फोन की कॉल रिकॉर्ड्स की जांच करवानी शुरू की है। इससे साजिश का सुराग कांग्रेस की तरफ मुड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक सरपंच इस मामले से पहले लगातार कांग्रेस के कुछ लोगों के संपर्क में था। यह बात भी सामने आई है कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि सोची समझी साजिश के तहत किया गया। इस बारे में न्यूज़लूज़ पर हमने 25 जुलाई को ही खबर दे दी थी।

और पढ़ें : ऊना में दलितों की पिटाई के पीछे कांग्रेस की साजिश

सरपंच के मोबाइल से ही बना था वीडियो

जांच में यह बात भी सामने आई है कि मारपीट का जो वीडियो वायरल हुआ वो सरपंच प्रफुल कोराट के मोबाइल फोन से ही बनाया गया था। इसे फोरेंसिक जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है। वीडियो को उसने व्हाट्सएप के जरिए सर्कुलेट किया ताकि इसे लेकर हंगामा खड़ा हो जाए और उसका नाम भी न आए। सीआईडी के सूत्रों के मुताबिक खुद प्रफुल्ल कोराट भी मारपीट वाली जगह पर मौजूद था। सरपंच के मोबाइल फोन रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है कि और कितने लोग इस मामले में शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि सरपंच की इलाके के कई छोटे-बड़े कांग्रेसी नेताओं से बातचीत होती थी।

पीटने वाले गोरक्षा समिति के लोग नहीं!

जांच में यह बात भी साफ हो चुकी है कि वीडियो में जो लोग मारपीट करते दिख रहे हैं उनका गोरक्षा समितियों से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस से पूछताछ में भी उन्होंने यह बात कबूली है कि इससे पहले उन्होंने गायों की रक्षा से जुड़े किसी काम में हिस्सा नहीं लिया था। ज्यादातर छोटे-मोटे लोकल बेरोजगार लड़के हैं। एक आरोपी की कांग्रेस के लोकल विधायक के पास आने-जाे की भी बात सामने आई है। फिलहाल सीआईडी इन सारी बातों के सबूत इकट्ठा कर रही है और बहुत जल्द दलित अत्याचार के नाम पर देश भर में उठाए गए इस विवाद का सच सामने आ जाने की उम्मीद है।

क्या थी दलितों पर हमले की सही वजह

खुद पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरपंच की नजर उनके इस्तेमाल में आ रही एक जमीन पर थी। इसे खाली कराने के लिए उसने बालू सरवैया को कई बार धमकियां दी थीं। सरपंच को इस परिवार के गायों का चमड़ा निकालने के कारोबार पर भी ऐतराज था। इसके लिए उसने कहा था कि अगर तुमने यह काम बंद नहीं किया तो एक दिन मैं तुम्हारी मरी गाय को जिंदा कर दूंगा।

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