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नसीमुद्दीन सिद्धिकी पर ‘मुलायम’ क्यों हैं अखिलेश

अखिलेश यादव की पुलिस ने मायावती को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही यह अटकलबाजी भी लगने लगी है कि क्या इसी मामले से जुड़े दूसरे केस में भी यूपी पुलिस कार्रवाई करेगी? जिस तरह से मायावती पर टिप्पणी करने पर दयाशंकर सिंह के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है उसी तरह बीएसपी के नेता नसीमुद्दीन सिद्धिकी पर दयाशंकर की नाबालिग बेटी के खिलाफ भद्दी टिप्पणी का आरोप है। सिद्धिकी पर पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

नसीमुद्दीन पर कार्रवाई के कम आसार

दरअसल यूपी में एसपी और बीएसपी के बीच एक अलिखित समझौता है। इसके तहत दोनों पार्टियां सत्ता में आने पर कभी एक-दूसरे के बड़े नेताओं के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं करतीं। यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मायावती के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया था, लेकिन जब वो सत्ता में आए तो उन्होंने बीएसपी के किसी नेता पर कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में इस बात की उम्मीद न के बराबर है कि नसीमुद्दीन सिद्धिकी के खिलाफ अखिलेश यादव सरकार कोई कार्रवाई करेगी।

दयाशंकर की पत्नी ने दर्ज कराया है केस

दयाशंकर के बयान के खिलाफ प्रदर्शन में बीएसपी के नेता नसीमुद्दीन सिद्धिकी ने मां और बेटी पर बेहद भद्दी टिप्पणियां की थीं। उन्होंने बीएसपी के बाकी समर्थकों को भी उकसाया, जिसके बाद उन्होंने मंच से गालियां बकीं। पहली नजर में नसीमुद्दीन सिद्धिकी के खिलाफ कार्रवाई के सारे सबूत और साक्ष्य हैं, हैरत की बात है कि पुलिस ने उस शिकायत पर अब तक कार्रवाई भी शुरू नहीं की हैं।

पॉक्सो एक्ट में मिलती है कड़ी सज़ा

2012 में बनाे इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय है। इस कानून की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म, कुकर्म या गलत बर्ताव किया गया हो। इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और जुर्माने का भी इंतजाम है।

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