दलित अत्याचार की यह खबर मीडिया ने दबा क्यों दी!

गुजरात में दलितों पर अत्याचार की झूठी-सच्ची खबरें इन दिनों मीडिया में छाई हुई हैं। इन सबके बीच गोधरा में दलित अत्याचार की एक खबर को दिल्ली की मीडिया ने लगभग पूरी तरह दबा दिया। यहां 20 साल के एक दलित लड़के को किडनैप करके बुरी तरह मारा पीटा गया। यह घटना मंगलवार देर रात की है। अगले दिन यह खबर गुजरात के कुछ लोकल अखबारों में छपी लेकिन दिल्ली के अखबारों और चैनलों ने आंख मूंद ली, वजह ये कि पिटाई करने वाले सभी आरोपी मुसलमान हैं।

क्या है ये पूरा मामला?

गोधरा के बहरपुरा में रहने वाले 20 साल के दलित लड़के अक्षय चौहान को मंगलवार की शाम को 15 से 20 मुसलमान युवकों ने अगवा कर लिया। अक्षय चौहान का इलाके में रहने वाली एक मुस्लिम लड़की से अफेयर चल रहा है और वो लड़की से मिलने उसके घर पर गया था। घटना के वक्त अक्षय अपनी दोस्त के साथ उसके घर की छत पर था। हमलावर बाइक से आए थे। लड़की के परिवार वालों ने जब दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने दरवाजा तोड़ डाला और अंदर घुस गए। हमलावर अक्षय को घसीटते हुए घर से बाहर ले आए और पास के खेतों में ले जाकर बेल्ट और लाठियों से मारा पीटा। इस दौरान उसे जाति के नाम पर गालियां भी दी गईं। हमलावरों ने उसे अधमरा करके खेतों में ही छोड़ दिया। होश में आने के बाद अक्षय को लोगों ने उसके घर पहुंचाया।

इस दलित से मिलने कोई नहीं आया

घटना के बाद से सभी आरोपी फरार हैं। पुलिस ने चार की पहचान कर ली है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। अक्षय का चेहरा बुरी तरह जख्मी है। पीठ पर भी चोट के गहरे निशान देखे जा सकते हैं। उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। अक्षय या उसके परिवार से मिलने अभी तक कोई भी नेता या अधिकारी नहीं आया है।

‘जय भीम-जय मीम’ नारे का क्या हुआ?

ऊना में दलितों पर हमले के फौरन बाद गुजरात के कई मुस्लिम संगठनों ने दलित-मुस्लिम एकता के नाम पर जय भीम, जय मीम देना शुरू कर दिया था। लेकिन जब खबर आई कि गोरक्षक के रूप में दलितों पर अत्याचार करने वालों में एक मुसलमान भी शामिल है तो इन संगठनों के लोगों ने चुप्पी साध ली। इस तथ्य को भी दिल्ली की मीडिया ने गायब कर दिया। हालत यह है कि गुजरात समेत तमाम राज्यों में जहां पर दलित अत्याचार के मामलों में आरोपी मुसलमान होते हैं उन खबरों को दिखाया ही नहीं जाता। जबकि साजिश के तहत किए गए दूसरे हमलों पर हंगामा खड़ा कर दिया जाता है। जाहिर है मीडिया का एक बड़ा तबका इस मामले में कांग्रेस के साथ मिलकर बीजेपी की सरकारों को बदनाम करने का खेल खेल रहा है।

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