गुजरात में दलितों की पिटाई में मुसलमान भी थे शामिल

गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई के मामले में बड़ा उलटफेर सामने आया है। बीते सोमवार को गिर सोमनाथ की पुलिस ने दलितों को पीटने वाले 2 और आरोपियों को पकड़ा है। इनमें से एक मुसलमान हैं। ये दोनों ही लड़के पिटाई के वीडियो में दलितों को पीटते हुए दिखाई दिए हैं। इस केस में गुजरात पुलिस अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। दिल्ली की मीडिया इस मामले को अगड़े और पिछड़े का मामला बना रही है, जबकि कुल 16 आरोपियों में सिर्फ एक ब्राह्मण है, जबकि 14 ओबीसी और एक मुसलमान है। (इसी पेज पर नीचे देखें पूरी लिस्ट) पीएम मोदी ने 12 जुलाई को विदेश से लौटने के बाद सबसे पहले इस मामले की जानकारी मंगाई थी। उन्हें पता था कि ऊना कांग्रेस का गढ़ है और चुनाव से पहले गुजरात सरकार को बदनाम करने की नीयत से साजिश के तहत ऐसी वारदात करवाई जा सकती है। ऐसी अटकलें भी हैं कि इस मामले में ऊना से कांग्रेस के विधायक वंश पंजाभाई भीमभाई के लोगों का भी हाथ हो सकता है।

दलितों की पिटाई का मुस्लिम एंगल!

17 साल का ये लड़का ऊना का ही रहने वाला है। नाबालिग होने की वजह से इसका नाम नहीं बताया जा सकता। यह लड़का भी दलितों को पीटते हुए दिखाई दे रहा है। दूसरा आरोपी जालम सिंह गोहिल है, जिसकी उम्र 27 साल है। ये भी ऊना के ही कंसारी गांव का रहने वाला है। जब भीड़ चारों पीड़ितों को जलूस बनाकर यहां-वहां घुमा रही थी तब भी ये मुस्लिम लड़का साथ में ही था। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। घटना के बाद 12 जुलाई को जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था उनके नाम हैं- रमेश जाधव, राकेश जोशी, नागजी अहीर, बलवंत गोस्वामी और प्रमोद गिरी गोस्वामी। इसके बाद नीलेश गोहिल और सतीश परमार नाम के दो और लड़कों की पहचान हुई और उन्हें पिछले हफ्ते शनिवार को गिरफ्तार किया गया। ये सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत पर जेल में हैं। पुलिस इन सभी आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड चेक कर रही है।

जांच में बड़ी साज़िश की ओर इशारा

पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि प्रमोद गिरी गोस्वामी ने अपने साथियों के साथ बालू सरवैया और उसके परिवार के सदस्यों को पीटा। 11 जुलाई को जिस वक्त यह घटना हुई ये लोग मोटा समधियाला गांव में अपने घर के बाहर मरी हुई गाय का चमड़ा उतार रहे थे। हमलावरों ने इसे गोहत्या का मामला माना। एफआईआर के मुताबिक हमलावरों ने बबलू के बेटे रमेश, वशराम और दो अन्य लोगों को अपनी कार में बिठा लिया और अपने साथ गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर ऊना ले गए। यह साफ नहीं है कि एक कार में इतने लोग कैसे समा गए। वहां पर उन्होंने चारों पीड़ितों को ऊना पुलिस थाने के बाहर रस्सी से बांध दिया और लाठियों से उनकी पिटाई शुरू कर दी। जिस तरह से यह वाकया हुआ है पुलिस इसके पीछे पूर्व नियोजित साजिश का शक जता रही है। हालांकि औपचारिक तौर पर अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। वैसे गुजरात का ऊना कस्बा कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

मामले में सक्रिय हुए मुस्लिम कट्टरपंथी

ऊना मामले में पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसमें से एक का भी बीजेपी या संघ परिवार से कोई नाता नहीं है। फिर भी दिल्ली में बैठी तथाकथित लिबरल मीडिया और मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इस मुद्दे पर दलितों को भड़काने का काम शुरू कर दिया इसी बहाने दलित-मुस्लिम एकता भी दिखाई जा रही है। अहमदाबाद के जुहापुरा में दलित-मुस्लिम एकता के नारे भी लगाए गए। ऐसे में पहली नजर में ही यह किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा लग रहा है।

उधर दिल्ली में बैठीं नक्सली नेता कविता कृष्णन ने ट्वीट करके कहा है कि ऊना मामले में दलितों और मुसलमानों का साथ आना अच्छी खबर है और इसे भी दादरी मामले की तरह उछाला जाना चाहिए।

नीचे यह उन 16 आरोपियों की लिस्ट है, जिसे पीड़ितों, गवाहों के बयान और वीडियो में दिखे चेहरों के आधार पर तैयार किया गया है। गुजराती भाषा में बनी इस लिस्ट में सभी आरोपियों के नाम उनकी जाति के साथ दिए गए हैं।

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