दुनिया के लिए अजूबे से कम नहीं हैं ये अग्नि योगी!

श्री रामभाऊ स्वामी बीते कई साल से दुनिया भर के लोगों के लिए अजूबा बने हुए हैं। उन्हें अग्नि योगी (Fire Yogi) के नाम से जाना जाता है। करीब 80 साल की उम्र के रामभाऊ स्वामी आग पर ऐसे लेट जाते हैं जैसे कोई अपने बिस्तर पर। उनके शरीर को आग छू भी नहीं पाती है। यहां तक कि उनके शरीर के कपड़े भी नहीं जलते। तमिलनाडु के तंजावुर में रहने वाले रामभाऊ स्वामी 1970 के दशक से यह चमत्कार कर रहे हैं। वो हिंदू धर्म और योग की ताकत का जीता जागता उदाहरण बन चुके हैं।

आग में क्यों नहीं जलते रामभाऊ स्वामी?

स्वामी रामभाऊ ने यह अग्नि योग अपने गुरु श्री राम नरेंद्र सरस्वती के सानिध्य में सीखा था। गुरु ने ही उन्हें वो 32 मंत्र दिए थे, जिनके प्रभाव से वो दहकती आग में भी सुरक्षित रहते हैं। उनके इस चमत्कार पर दुनिया के कई तर्कशास्त्री अध्ययन कर चुके हैं, लेकिन कोई भी अभी तक इसकी वैज्ञानिक वजह नहीं बता सका है। ये सबसे आश्चर्य की बात होती है कि उनका शरीर ही नहीं, शरीर पर पड़ा ऊनी या सूती कपड़ा भी सिर्फ किनारों से थोड़ा सा जलता है। जबकि इसी कपड़े को उनके शरीर से हटाकर जलाया गया तो फौरन आग पकड़ लेता है।

ध्यान और योग का है ये कमाल

अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट ई एफ ब्लॉक ने जब स्वामी रामभाऊ की कहानी सुनी तो वो इसे देखने के लिए खुद तंजावुर में उनके आश्रम आए थे। उन्होंने स्वामी जी को अपने साथ लाए कपड़े पहनने को दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने सफलता पूर्वक अग्नि योग करके दिखाया था। डॉक्टर ब्लॉक ने लिखा है कि स्वामी जी मेडिटेशन के दम पर अपने शरीर की ऊर्जा को इतना मजबूती दे देते हैं कि वो आग में उनके शरीर और कपड़ों के लिए प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम करने लगती है। नीचे लिंक पर क्लिक करके आप स्वामीजी के चमत्कार को खुद अपनी आंखों से देख सकते हैं। इसे 2002 में एक विदेशी डॉक्यूमेंटरी फिल्मकार ने बनाया था।

क्या कहते हैं रामभाऊ स्वामी?

खुद स्वामी जी का कहना है कि मनुष्य के शरीर में जीवनी शक्ति को प्राण कहते हैं। हमारे अस्तित्व का यही आधार है। अगर हम अपने प्राण को सही तरीके से नियमित करें तो न सिर्फ बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि भौगोलिक चीजों जैसे आग से भी शरीर को बचा सकते हैं।

  • 1961 में स्वामी जी ने अपने गुरु के साथ मिलकर अग्नि योग करना शुरू किया था।
  • 1972 में उन्होंने पूर्ण भोजन का त्याग कर दिया। फिलहाल वो सिर्फ उबला हुआ चावल और दूध लेते हैं।
  • 1975 में स्वामी जी ने जल का भी त्याग कर दिया। वो पानी नहीं पीते।
  • 1977  में उन्होंने आहार में सुबह शाम 2-2 केले और दूध लेना शुरू कर दिया।
  • 1979 में स्वामी जी ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया और पूरी तरह योगी का जीवन अपना लिया।

अग्नि योग का क्या है उद्देश्य

स्वामी रामभाऊ का कहना है कि उनके इस योग का उद्देश्य विश्व में शांति और सद्भाव लाना है। उनका कहना है कि इस योग से उनके अंदर के विकारों का दमन होता है और साथ ही इससे पूरे विश्व में सकारात्मक ऊर्जा मजबूत होती है।

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