हाशिम अंसारी भी ‘मोदी भक्त’ थे, सुनिए उनका बयान

अयोध्या में बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि मुकदमे के सबसे बुजुर्ग याचिकाकर्ता हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में निधन हो गया। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में हाशिम अंसारी की काफी इज्जत थी। बाबरी विवाद को लेकर इतने तनाव के बीच भी हाशिम अंसारी ने अपनी इस खूबी को हमेशा कायम रखा। यह बात कम लोग ही जानते होंगे कि हाशिम अंसारी निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने इस बारे में अपनी राय को कभी छिपाने की कोशिश नहीं की। मौत से कुछ वक्त पहले हाशिम अंसारी ने मीडिया के आगे बयान दिया था कि अयोध्या मसले को अगर कोई हल कर सकता है तो वो नरेंद्र मोदी हैं। हाशिम अंसारी भी हमेशा आपसी सुलह-सफाई से विवाद सुलझाने के पक्षधर रहे थे और अब इस काम के लिए उनकी सबसे बड़ी उम्मीद मोदी थे।

‘देश के सबसे मजबूत लीडर हैं मोदी’

हाशिम अंसारी ने कुछ दिनों पहले अपने घर पर मीडिया से बातचीत में कहा था कि मैं दिल की गहराइयों से मोदी की तारीफ करता हूं और करता रहूंगा। उन्होंने मोदी को देश का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री माना था। उनका कहना था कि मुसलमानों को मोदी से डरने की कोई जरूरत नहीं है। वो मुस्लिम समुदाय का कभी नुकसान नहीं कर सकते। इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे तब भी हाशिम अंसारी ने उन्हें अयोध्या आने का न्यौता दिया था और कहा था कि अगर वो आए तो उनका स्वागत करने मैं खुद जाऊंगा।

यूपी चुनाव में मुसलमानों से की थी अपील

हाशिम अंसारी ने कुछ दिन पहले मुसलमानों से अपील की थी कि वो आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में मोदी के नाम पर वोट दें। अंसारी का कहना था कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो मंदिर-मस्जिद का मसला ठीक से सुलझ जाएगा। बहुत बुजुर्ग होने के बावजूद हाशिम अंसारी देश और दुनिया की खबरों पर पैनी नज़र रखते थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि मोदी ने मुसलमानों की पढ़ाई-लिखाई और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट बढ़ाया है। मुसलमानों को इस बात को समझना चाहिए और उन्हें अपना दुश्मन मानना बंद कर देना चाहिए।

कांग्रेस, सपा से बेहद नाराज थे अंसारी

हाशिम अंसारी हमेशा कहते थे कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी मुसलमानों को मोदी का डर दिखाकर वोट पाने की कोशिश करती हैं, लेकिन कभी मुसलमानों के बच्चों की भलाई के लिए कुछ नहीं करतीं। हाशिम अंसारी बीजेपी के किसी और नेता की कभी तारीफ नहीं करते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी के लिए उनकी बेबाक राय बहुतों को हैरत में डाल देती थी। यह अलग बात कि जीते-जी वो एक बार भी नरेंद्र मोदी से नहीं मिले और अयोध्या विवाद खत्म होने की आस लिए वो इस दुनिया से रुख़सत हो गए।

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