केजरीवाल का ‘टॉक टू एके’ फिक्स था!, देखिए वीडियो

अरविंद केजरीवाल के प्रोग्राम ‘टॉक टू एके’ (Talk To AK) में बाकायदा फिक्सिंग हुई थी। जनता से सीधे जुड़ने के नाम पर शुरू किए गए इस प्रोग्राम में जिन लोगों के सवाल लिए गए उनमें से ज्यादातर फिक्स थे। प्रोग्राम की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। केजरीवाल और सिसोदिया जानते थे कि किन सवालों के जवाब उन्हें देने हैं। सवाल पूछने वाले भी आम लोग नहीं, बल्कि AAP के कार्यकर्ता या समर्थक ही थे। इस प्रोग्राम से जुड़े आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी है। इस बारे में एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसे देखकर आप समझ सकते हैं कि Talk to AK से कैसे आम लोगों और असली फरियादियों को दूर रखा गया।

इस वीडियो में क्या है?

दरअसल यह प्रोग्राम शुरू होने से पहले की बातचीत का 1 मिनट 17 सेकेंड का वीडियो है। वीडियो के दो हिस्से हैं।

पहले हिस्से में यह बात हो रही है कि जब आम आदमी पार्टी के दागी विधायकों वाला सवाल आएगा तो दिल्ली कैंट से विधायक सुरेंद्र कमांडो को मंच पर बुलाया जाएगा। खुद केजरीवाल सुरेंद्र कमांडो से कहते हैं कि “जब आपको बुलाएं आप यहां आकर बैठ जाना, फिर चले जाना जब हो जाए।” विधायक से पहले केजरीवाल ने प्रोग्राम के होस्ट विशाल डडलानी को भी इस बारे में इशारा कर दिया था।

दूसरा हिस्सा इसके फौरन बाद शुरू हो जाता है। इसमें प्रोग्राम से पहले ही चंदन कुमार चौधरी नाम के एक विकलांग शख्स का फोन आ जाता है। मना करने और 11 बजे के बाद फोन करने की नसीहत के बाद भी वो बोलना शुरू कर देता है। वो बताता है कि आम आदमी पार्टी के विधायक उसकी सुनवाई नहीं करते हैं। इसके बावजूद मंच पर बैठे सीएम या डिप्टी सीएम उसे जवाब नहीं देते। विशाल डडलानी ने उस विकलांग शख्स को 11 बजे के बाद फोन करने को बोलकर टरका दिया। प्रोग्राम शुरू होने के बाद केजरीवाल ने उस विकलांग का सवाल लेने तक की जरूरत नहीं समझी।

जनता से सीधी बातचीत सिर्फ ड्रामा थी?

हमारे सूत्र ने बताया इस प्रोग्राम में सवाल से लेकर जवाब तक हर चीज की पहले से तैयारी थी। सवालों की लिस्ट पहले से तय थी। प्रोग्राम को लाइव इसलिए रखा गया ताकि ऐसा लगे कि सारे सवाल असली हैं और सीधे आम लोग पूछ रहे हैं। फोन ही नहीं, बल्कि ईमेल, ट्विटर और वेबसाइट से मिले ज्यादातर सवाल दिल्ली के लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों, बिजली-पानी कटौती और सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी से जुड़े थे। दिल्ली के एक व्यापारी ने वैट डिपार्टमेंट की लूट का जिक्र किया था। लेकिन दिल्ली की जनता से जुड़ी समस्याओं को ज्यादा जगह नहीं दी गई। इसके बजाय केजरीवाल दिल्ली वालों के टैक्स के पैसे पर अपनी ही डींग हांकते रह गए।

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