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जब बाल ठाकरे के डर से भाग गए थे कश्मीरी आतंकी!

कश्मीर में इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के चलते अमरनाथ यात्रा को बार-बार रोकना पड़ता है। यात्रियों की सुरक्षा पहले से ही खतरे में है। अब तक अमरनाथ यात्रियों की बसों पर हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में बाल ठाकरे की कमी हर किसी को खल रही है। कुछ ऐसे ही हालात में एक बार बाल ठाकरे के एक बयान के बाद अमरनाथ यात्रा फौरन बहाल हो गई थी। यह कहानी जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उन्हीं बाल ठाकरे का बेटा उद्धव ठाकरे अब सेकुलर बनने की कोशिश में है।

अमरनाथ यात्रा बंद करने की थी धमकी

यह 1990 के आसपास का वाकया है। तब कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद का तांडव चरम पर था। पूरी घाटी से कश्मीरी पंडितों को भगाया जा रहा था। सैकड़ों हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, जबकि न जाने कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। सेकुलरिज्म के नाम पर कांग्रेस की सरकारों ने इस अत्याचार की खबर को दबा दिया। उसी साल अमरनाथ यात्रा को रोकने की भी धमकी दी गई थी। कश्मीर में सक्रिय इस्लामी आतंकवादी संगठनों ने साफ-साफ धमकी दे दी थी कि अगर अमरनाथ यात्री आए तो वो वापस नहीं जा पाएंगे।

बाल ठाकरे ने दिया था करारा जवाब

लग रहा था कि अब हिंदुओं की सबसे पवित्र माने जाने वाली अमरनाथ यात्रा संभव नहीं हो पाएगी, क्योंकि उस वक्त की सरकार भी इस धमकी को लेकर चुप्पी साधे हुए थी। तब बाल ठाकरे के एक बयान ने सारी तस्वीर बदल दी थी। बाल ठाकरे ने कहा था कि “हज के लिए जाने वाली 99 फीसदी फ्लाइट मुंबई एयरपोर्ट से जाती हैं देखते हैं कि यहां से कोई हज यात्री कैसे मक्का-मदीना जाता है।” इस बयान का असर ये हुआ कि अगले ही दिन से अमरनाथ यात्रा दोबारा शुरू हो गई।

हर साल आतंकवादी डालते हैं बाधा

तब से अमरनाथ यात्रा चल जरूर रही है, लेकिन आतंकवादियों का खतरा हर वक्त मंडरा रहा होता है। भारत जैसे देश में हिंदू अपनी ही तीर्थयात्रा में डरे-सहमे हुए जाते हैं। आज बाल ठाकरे जैसा कोई नेता भी नहीं है जो इतना दम रखता हो कि उसके एक बयान के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों का सारा नशा एक झटके में उतर जाए। अमरनाथ यात्रियों पर हमला करने वालों के लिए मीडिया एक शब्द भी नहीं बोलता, लेकिन अगर कोई हिंदू नेता ऐसी धमकी दे भी देगा तो देश का जिहादी मीडिया उसे कच्चा चबा जाएगा।

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