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रवीश जी, एक खुली चिट्ठी बरखा दत्त को भी भेजो

dharmendra singhदेश में दलालों की, खासकर पत्रकार के भेष में दलालों की कोई कमी नहीं है। मगर दलाली में डूबे चैनल का पत्रकार अगर किसी पत्रकार के मंत्री बनने पर सवाल उठाता है, खुली चिट्ठी लिखता है तो हंसी के साथ गुस्सा भी आता है। जिस ग्रुप के लाखों- करोड़ों में खेलने हैं, तथाकथित एलिट बनकर दुनिया को इसकी धौंस भी दिखाते हैं। जिस चैनल के पत्रकार के बच्चे दिल्ली के बड़े स्कूलों में आसानी से दाखिला पा जाते हैं। जिस ग्रुप की पत्रकार की दलाली का सच राडिया टेप में कैद है। जिस ग्रुप के खिलाफ सैकड़ों करोड़ का ब्लैक मनी हजम करने का केस चल रहा है। जो लोग बिना किसी साक्ष्य के नरेंद्र मोदी और अमित शाह को कातिल साबित करने के लिए 12 साल से पत्रकारिता का मुंह काला करते रहे। जिन्हें कन्हैया के शक्ल में क्रांतिकारी दिखता है, जिन्होंने कांग्रेस के घोटाले के पैसे से ऐश किए। जिन्हें स्मृति इरानी से नफरत है और प्रियंका वाड्रा में भारत की महारानी बनने के लक्षण दिखते हैं। आज उनका एक साथी पूरे देश को नैतिकता की पाठ पढ़ा रहा है। राजीव शुक्ला के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाला पत्रकार एमजे अकबर को अपने तरीके से दलाल साबित करने की कोशिश कर रहा है। दूसरों को बड़ी बड़ी चिट्ठियां लिखने से पहले अपने आसपास के लोगों को एक छोटा सा नोट ही लिखकर उनको आईना दिखाते और खुद देख लेते।
रवीश कुमार जी छोड़ो ना पत्रकारिता और आ जाओ राजनीति के मैदान में। अब कोई अन्ना नहीं आएगा, जिसकी सवारी करके आप कहीं के मुख्यमंत्री बन जाओगे। किस बात का इंतजार है? क्या राज्यसभा सीट पक्की करने के बाद मैदान में आएंगे क्या?

(यह पोस्ट पत्रकार धर्मेंद्र के. सिंह के फेसबुक वॉल से ली गई है। एमजे अकबर के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से बौखलाए रवीश कुमार ने हाल ही में उन्हें एक खुला पत्र भेजा है, जिसके जवाब में धर्मेंद्र के. सिंह ने रवीश कुमार को आईना दिखाया है।)

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