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इस्लामी आतंकवाद का चेहरा बन चुकी है ये लड़की!

लामिया बशर का आज यह हाल है। दायीं तस्वीर उस मोबाइल ऐप की है, जिस पर उसे जानवरों की तरह खरीदा-बेचा जा रहा था। उस ऐप पर आज भी इस यजीदी लड़की का प्रोफाइल है।

यह लड़की दुनिया भर में इस्लामी आतंकवाद की बर्बरता का प्रतीक बन चुकी है। 18 साल की इस यजीदी लड़की का चेहरा जब दुनिया के आगे आया तो हर किसी की रूह कांप गई। इसकी कहानी जिसने भी सुनी वो दहल गया। लामिया आज़ी बशर नाम की यह लड़की जब 12 साल की थी तो उसे साढ़े 12 हजार रुपये में बेच दिया गया। बेचने वाले इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी थे और खरीदने वाले भी उन्हीं के लोग। यजीदी इराक में रहने वाले अल्पसंख्यक हैं, इस्लामी आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार यही लोग हुए हैं। बगदादी के गिरोह इनकी महिलाओं और बच्चों को सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं।

लगाई जाती थी सेक्स गुलामों की मंडी

लामिया कभी आम यजीदी लड़कियों की तरह बेहद खूबसूरत हुआ करती थी। जब इस्लामिक स्टेट ने उनके शहर पर कब्जा कर लिया तो उन्होंने उसे और उसके जैसी तमाम लड़कियों को गुलाम बना लिया। इन लड़कियों को पालतू जानवरों की तरह स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए बेचा जाता था। लामिया भी एक के बाद दूसरे आदमी के हाथ बेची-खरीदी जाती रही। इस्लाम के ये झंडाबरदार सेक्स स्लेव्स का बाकायदा रजिस्ट्रेशन करके रखते थे। अगर कोई लड़की भागने की कोशिश करती थी तो फौरन सभी चेकपोस्ट और नाके पर अलर्ट पहुंच जाता था और उसे पकड़ लिया जाता था। लामिया ने भी चार बार भागने की कोशिश की, लेकिन हर बार पकड़ी गई। इस साल मार्च में जब वो अपने मालिक का घर छोड़कर भागी तो उसे रोकने वाला कोई नहीं था, क्योंकि जहां पर उसे रखा गया था वो इलाका इराक की सरकारी सेनाओं के कब्जे में आ चुका था।

लामिया ने भागकर बचाई अपनी जान

लामिया अपने मालिक के घर से जब भाग रही थी तो रास्ते में एक जगह बारूदी सुरंग के धमाके में उसकी साथी 20 और 8 साल की दो लड़कियों की मौत हो गई। खुद लामिया की दायीं आंख भी इस धमाके में जख्मी हो गई और अब ये आंख खराब हो चुकी है। धमाके में उसका आधा चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। अस्पताल में इलाज के बाद अब उसके खूबसूरत चेहरे का ये हाल हो चुका है। लामिया अब उत्तरी इलाक के बादरे कस्बे में अपने चाचा के घर पर रहती है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट ने इस लड़की की आपबीती छापी तो दुनिया भर में उसे लोगों ने पढ़ा।

यजीदियों को दुश्मन मानते हैं सुन्नी

यजीदी मुसलमान, ईसाई और यहूदियों की मिलीजुली परंपरा को मानते हैं। खाड़ी युद्ध से पहले इराक में इनकी आबादी 5 लाख के करीब थे। लेकिन आज इनकी आबादी बेहद कम रह गई है। आसपास के सुन्नी मुसलमान इन सीधे-सादे लोगों को अपना दुश्मन मानते हैं। यही वजह है कि शिया और दूसरे ट्राइब के मुसलमानों के बजाय यजीदियों पर सुन्नी कट्टरपंथियों ने सबसे ज्यादा अत्याचार किया है। यहां की स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक यजीदियों पर किए गए जुल्मो-सितम से खुदा को खुशी मिलती है। जाहिर है यजीदी लोगों के लिए इराक का इस्लाम और उसके मानने वाले किसी हैवान से कम नहीं हैं।
नीचे के वीडियो पर क्लिक करके आप लामिया की हालत देख सकते हैं। इसे देखने के लिए मजबूत कलेजे की जरूरत होगी।

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