‘साहब हम हिंदू हैं, हमारी यहां कोई सुनवाई नहीं’

ये फरियाद है बिहार के किशनगंज में रहने वाले एक दलित मां-बाप की, जिनकी नाबालिग बेटी को उनकी ही आंखों के आगे अगवा कर लिया गया। थाने से लेकर जिले के बड़े पुलिस अफसरों तक चक्कर लगा चुके हैं। कहीं पर भी कोई फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। कारण यह कि वो हिंदू हैं और अपहरण करने वाले ‘शांतिप्रिय समुदाय के लोग हैं। खुद लड़की के पिता भी कह रहे हैं कि ‘हम हिंदू हैं इसलिए हमारी कोई सुनवाई नहीं है, किसी मुसलमान के साथ यह होता तो अब तक न जाने कितनी रेड पड़ गई होतीं’।

बेटी को स्कूल भेजना पड़ा महंगा

किशनगंज के खगड़ा में रहने वाले इस दलित मां-बाप का गुनाह सिर्फ इतना था कि उन्होंने मेहनत मजदूरी करके अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखी। ताकि बेटी बड़ी होकर उनके बुढ़ापे का सहारा बन सके। लेकिन बच्ची पर उसी मोहल्ले के रहने वाले अब्दुल रजा और उसके दोस्तों की नज़र पड़ गई। स्कूल आते-जाते ये गुंडे उसका पीछा करते थे। बार-बार शिकायत के बाद भी पुलिस ने इस दलित परिवार की कोई मदद नहीं की। 28 जून मंगलवार को अब्दुल रजा और उसके साथियों ने इनकी बेटी को जबरन बाइक पर खींच लिया और भाग गए। जब वो इसकी शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो वहां दरोगा ने उन्हें गाली देनी शुरू कर दी और कहा कि वो झूठा केस दर्ज करवाने आए हैं।

नीचे वीडियो में आप पीड़ित लड़की के पिता की आपबीती सुनकर दंग रह जाएंगे।

मंत्री ने कहा- पहले एप्लिकेशन लाओ

जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो मां-बाप ने जिले के दौरे पर आए बिहार के एसी-एसटी मंत्री संतोष कुमार निराला से भी फरियाद की। लेकिन नीतीश सरकार के इस मंत्री का रवैया बेहद चौंकाने वाला था। मंत्री ने जिले के अफसरों को कार्रवाई का आदेश देने के बजाय इस अनपढ़ दलित मां-बाप को ही पहले एप्लिकेशन लिखकर लाने का फरियाद सुना दिया। सवाल यह है कि क्या दलित उत्पीड़न के मामले में बिहार सरकार पहले एप्लिकेशन लेती है और कार्रवाई बाद में करती है?

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बिहार में दलितों पर अत्याचार बढ़ा

नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद से बिहार में दलितों पर अत्याचार के मामलों में तेज़ी आई है। आरजेडी विधायक राजबल्लभ यादव पर जिस नाबालिग लड़की से रेप का आरोप है वो भी दलित है। पीड़ित परिवार आज भी दहशत के बीच जी रहा है और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलती रहती हैं। पिछले दिनों मोतिहारी में एक दलित छात्रा से बर्बर तरीके से बलात्कार हुआ था। उस केस में भी आरोपी ‘शांतिप्रिय समुदाय’ के लोग हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी दलितों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार के दबाव में मीडिया इन खबरों को सिरे से गायब कर दे रहा है।

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