7वां वेतन आयोग: BJP की जड़ें खोद रहे हैं जेटली?

क्या फौजियों और कारोबारियों के बाद अब वित्त मंत्री अरुण जेटली सरकारी कर्मचारियों को बीजेपी से दूर करने के खेल में जुटे हैं? आज आए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को देखकर कुछ ऐसा ही लग रहा है। अरुण जेटली पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वो बीजेपी के अंदर रहकर कुछ-कुछ ऐसा करते रहते हैं जिससे नरेंद्र मोदी सरकार के समर्पित वोटर उनसे नाराज होकर दूर हो जाएं। आज सुबह अरुण जेटली ने खुद ट्वीट करके सरकारी कर्मचारियों को सैलरी में ‘ऐतिहासिक बढ़ोतरी’ की बधाई दे दी थी। इसके बाद ही कर्मचारियों की उम्मीदें बंध गई थीं कि अबकी बार पिछली बार की 50% से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। क्योंकि वो अब तक के इतिहास में वेतन में हुआ सबसे बड़ा इजाफा था। देखिए क्या कहा था वित्त मंत्री ने अपने ट्वीट में।

जेटली ने जानबूझकर लोगों को भड़काया

सातवें वेतन आयोग के मुताबिक अगले 10 साल के लिए सैलरी में 23 फीसदी के आसपास बढ़ोतरी हुई है। ऊपर से हाउस रेंट अलाउंस में कटौती कर दी गई। वैसे तो कुल मिलाकर 23 फीसदी की बढ़ोतरी को कम नहीं कहा जा सकता। ऐसे वक्त में जब प्राइवेट सेक्टर में बहुत ज्यादा पैसे नहीं बढ़ रहे हैं, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इतनी बढ़ोतरी अच्छी मानी जा सकती है। लेकिन जेटली ने सुबह-सुबह ‘ऐतिहासिक बढ़ोतरी’ का ऐलान करके लोगों की उम्मीदें बढ़ा दीं। जब लोगों की उम्मीदें टूटीं तो सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़क उठा। कई लोग यह भी कह रहे हैं कि अरुण जेटली ने नरेंद्र मोदी और बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की नीयत से ऐसा किया है। देखिए वो लोग क्या कह रहे हैं जो कल तक सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी सरकार के पक्ष में बोला करते थे।

ब्रांड मोदी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

जेटली के इस खेल का कुल मिलाकर नतीजा यह है कि अब करोड़ों केंद्रीय कर्मचारी और उनके परिवार वाले मोदी सरकार से नाराज हैं। उधर किसानों, प्राइवेट कर्मचारियों और कारोबारियों को लग रहा है कि सरकार सिर्फ कर्मचारियों पर मेहरबान है। मतलब मोदी सरकार के लिए माया मिली न राम। अरुण जेटली को खुद कोई चुनाव लड़ना नहीं है। विधानसभा चुनावों में बीजेपी को इससे जो नुकसान होगा उसकी भी वो जिम्मेदारी नहीं लेंगे। महंगाई बढ़ेगी उस पर भी जेटली से कोई सवाल नहीं पूछे जाएंगे।

किसानों, फौजियों, कारोबारियों को भी भड़काया

जेटली की राजनीति का ही नतीजा है कि मोदी सरकार अपने सभी हार्डकोर वोटरों के बीच नाराजगी बटोर चुकी है। पहले जमीन अधिग्रहण बिल पर बेमतलब जोर देकर जेटली ने किसानों को नाराज करवाया। फिर वन रैंक, वन पेंशन को जानबूझकर इतनी देरी करवाई, जिससे फौजियों में सरकार को लेकर असंतोष पैदा हुआ। इसके बाद ज्वैलरी उद्योग पर 1% का टैक्स लगाकर कारोबारियों को नाराज किया। भले ही यह टैक्स उचित था, लेकिन इसे लागू करने में जेटली थोड़ा व्यावहारिक तरीका अपना सकते थे। लेकिन उन्होंने इसको लेकर संसद में भी अहंकार से भरी बयानबाजी की, जिससे कारोबारियों में सरकार को लेकर नाराजगी पैदा हो गई। अब उनके टारगेट पर कर्मचारी वर्ग है, जिसे मोदी सरकार से दूर करने का उनका बड़ा औजार 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें बन गई हैं।

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