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ये अखबार आतंकियों को ‘बागी’ और ‘शहीद’ मानते हैं!

क्या देश के बड़े अखबारों के दफ्तरों में इस्लामी आतंकवाद के समर्थक पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं? यह सवाल उठ खड़ा हुआ है आज टाइम्स ग्रुप के दो बड़े अखबारों ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘नवभारत टाइम्स’ की पहली खबरों को देखकर। दोनों ही अखबार ने कश्मीर में कल हुए आतंकवादी हमले के लिए काफी अच्छे शब्दों का इस्तेमाल किया है। कल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर पंपोर के पास लश्कर ए तैयबा के आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की टीम पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें 8 जवान शहीद हो गए थे।

नवभारत टाइम्स ने आतंकवादी को शहीद बताया

आम तौर पर सेमी-पोर्न तस्वीरें छापने के लिए बदनाम नवभारत टाइम्स ने तो सारी हदें पार कर दीं। इसने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया जिसमें बताया गया कि एक आतंकवादी ‘शहीद’ हुआ है। ये ऐसी गलती है जो आम तौर पर कोई अखबार या चैनल नहीं करता। अखबार इसे भूल बताकर पल्ला झाड़ सकता है, लेकिन मामला दरअसल कहीं न कहीं दिल की बात गलती से जुबान पर आ जाने का है।

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इस ट्वीट को देखकर जब लोगों का गुस्सा भड़क उठा तो काफी देर के बाद इसे चुपचाप डिलीट कर दिया गया।

हद तब हो गई जब नवभारत टाइम्स ने अगली सुबह अपने प्रिंट एडिशन में आत्मघाती आतंकवादियों को ‘फिदायीन’ कहकर संबोधित किया। यह बात सभी जानते हैं कि आतंकवादी इस्लामी परंपरा के मुताबिक खुद को फिदायीन कहलाने में बहुत गौरव महसूस करते हैं। अक्सर मीडिया बेवकूफी में यह शब्द आतंकवादियों के लिए इस्तेमाल करती है। लेकिन पहले पेज की पहली हेडलाइन में ऐसी गलती कम ही होती हैं, क्योंकि इस पेज पर अखबार के सबसे सीनियर लोग काम करते हैं। ज्यादा संभावना है कि उन्होंने आतंकवादियों को सम्मान देने की नीयत से ही यह शब्द इस्तेमाल किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने कहा ‘बागी’

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने हमलावरों को आतंकवादी कहने की बजाय उन्हें Rebels यानी ‘बागी’ कहा है। जबकि कश्मीर में सक्रिय खुफिया एजेंसियों ने इस बात की पुष्टि की है कि हमलावर पाकिस्तान से आए घुसपैठिए थे। ऐसे में आतंकवादियों के लिए ‘बागी’ जैसा सम्मानजनक शब्द प्रयोग करना शक पैदा करता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के दिल में आतंकवादियों के लिए इतनी इज्ज़त लोगों को खटक रही है और लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जताया है।

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