रवीश जी, आपको अपने गांव की ‘निर्भया’ नहीं दिखती?

Vijay Jhaबिहार के एक स्वनामधन्य जनता के पत्रकार जिनका माइक तुरंत निठारी तो पहुँच जाता है लेकिन बिहार में वो अपने ही गांव जहाँ वो खुद पैदा हुए वहां की निर्भया को देखने… उसे बचाने और उसके साथ बर्बरता के साथ गैंगरेप करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए नहीं पहुंचता है। मैं बात कर रहा हूँ रवीश कुमार की, जो उसी मोतिहारी शहर के रहने वाले हैं जहां एक मासूम बच्ची के साथ शांतिप्रिय समुदाय के कुछ लोगों ने दिल्ली के निर्भया की तरह बलात्कार किया.. उसके गुप्तांग में बंदूक और लकड़ी आदि घुसेड़ दी। लड़की जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही है। मीडिया में वीभत्सता की खबर आने के बाद मजबूरी में सही नीतीश कुमार की पुलिस ने पीड़ित लड़की का मेडिकल टेस्ट करवाया, वो भी पूरे एक सप्ताह बीत जाने के बाद। घटना के 10 दिन गुजर जाने के बाद अभी तक एक भी बलात्कारी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।

क्या रवीश कुमार में इतनी भी नैतिकता नहीं बची है कि वो अपने ही गांव की निर्भया को न्याय दिलाने लिए अपने चैनल पर एक ढंग की रिपोर्ट करते। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी बैसाखी लालू प्रसाद यादव के साथ अपनी नजदीकियों का फायदा उस निर्भया को भी दिलाते जो आज मृत्यु की चौखट पर खड़ी है। क्या रवीश कुमार की सारी पत्रकारिता जाति और धर्म के आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण करवाने के लिए ही होगा? उनकी पत्रकारिता में राजनीति से हटकर मानवीय संवेदनाओं के लिए कोई जगह नहीं है।

(ऊपर के विचार विजय झा के फेसबुक पेज से साभार लिए गए हैं)

क्या है मोतिहारी का ‘निर्भया’ कांड?

बिहार के मोतिहारी में एक नवविवाहिता लड़की से 13 जून को बलात्कार हुआ था। आरोप समीउल्ला नाम के एक गुंडे और उसके साथियों पर है। दरिंदों ने लड़की के साथ गैंगरेप किया और बेहोश हालत में उसे सड़क पर फेंक कर भाग गए। लड़की के शरीर के प्राइवेट पार्ट्स में पिस्तौल और लकड़ी घुसाने की कोशिश की गई थी। इस वजह से इसे बिहार का निर्भया कांड कहा जा रहा है। पीड़ित लड़की मोतिहारी के अस्पताल में भर्ती है।

आरोपी को बचाने की कोशिश में पुलिस

इस केस में आरोपी समीउल्ला को पुलिस ने पूरे 9 दिन के बाद गिरफ्तार किया। उसके बाकी सभी साथी पकड़े जा चुके हैं। लेकिन पुलिस ने उन पर सिर्फ बलात्कार की कोशिश का आरोप लगाया है। आरोप है कि एक खास संप्रदाय को नाराज न करने की नीयत से बिहार सरकार मामले की लीपापोती कर रही है। अस्पताल के डॉक्टरों पर दबाव डलवा कर यह मेडिकल रिपोर्ट दिलवाई गई है कि लड़की से बलात्कार हुआ ही नहीं है। जबकि उसी अस्पताल की महिला डॉक्टरों ने माना है कि लड़की के अंदरुनी अंगों में गहरी चोटें हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम पहुंची

इस मामले में गृह मंत्रालय ने बिहार सरकार से रिपोर्ट मांगी है। उधर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा शाह जब जांच के लिए मोतिहारी के अस्पताल पहुंचीं तो वहां के हालात देखकर दंग रह गईं। पीड़ित और उसकी मां को केस वापस लेने और कुछ भी न बताने की धमकी दी गई थी। जब सुषमा शाह ने खुद लड़की की जांच की तो उन्होंने पाया कि उसके शरीर के अंग बुरी तरह घायल हैं। जबकि डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट में इसका जिक्र तक नहीं किया था। जब उन्होंने इस बारे में डॉक्टरों और प्रशासन से बात करनी चाही तो अस्पताल के सुपरिटेंडेंट और जिले के एसपी मौके से भाग गए।

दिल्ली का मीडिया नीतीश सरकार के बचाव में

दिल दहलाने वाला मामला होने के बावजूद दिल्ली की मीडिया इस मामले को दबाने की कोशिश में है। ज्यादातर तथाकथित राष्ट्रीय अखबार और चैनल इस खबर को या तो नहीं दिखा रहे हैं या रस्मअदायगी भर कर रहे हैं। इसकी वजह यह कि मीडिया में बैठे नीतीश कुमार के हितैषी नहीं चाहते कि एक बार फिर से राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हों। हालात ये हैं कि कांग्रेस और वामपंथ का मुखपत्र समझे जाने वाले एक न्यूज़ पोर्टल ने खुलकर यह कहना शुरू कर दिया कि लड़की से बलात्कार हुआ ही नहीं और वो झूठ बोल रही है। जबकि इस वेबसाइट का रिपोर्टर कभी मौके पर गया तक नहीं।

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