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मोदी सरकार में कैसे घुसा ‘कांग्रेस का एजेंट’?

बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सरकार के अंदर बैठे कांग्रेस के वफादारों की पोलखोल का अभियान शुरू कर दिया है। शुरुआत हुई है केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम से। अरविंद सुब्रह्मण्यम का नाम रिजर्व बैंक के अगले गवर्नर के तौर पर भी चल रहा है। आज सुबह-सुबह एक ट्वीट करके स्वामी ने अरविंद सुब्रह्मण्यम को कांग्रेस का एजेंट करार दिया। स्वामी का आरोप है कि GST पर कांग्रेस को अपनी मांगों पर अड़े रहने के लिए अरविंद ने ही कहा था। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने यह बात भी सामने लाई है कि 2013 में अरविंद ने अमेरिकी कांग्रेस से सिफारिश की थी कि वो अमेरिका की दवा कंपनियों के हितों के खिलाफ काम करने के लिए भारत के खिलाफ कार्रवाई करे।

अरविंद सुब्रह्मण्यम के पीछे सोनिया?

ट्विटर पर ही एक व्यक्ति ने स्वामी से पूछा है कि अरविंद सुब्रह्मण्यम की नियुक्ति तो मोदी सरकार के वक्त में हुई है तो वो इसके लिए किसे दोषी मानते हैं तो स्वामी ने अपनी कोड भाषा में सोनिया गांधी का नाम लिया है। उनकी दलील रही है कि अरविंद सुब्रह्मण्यम जैसे व्यक्ति को मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाने के लिए मजबूर किया गया था। सवाल आता है कि क्या इसके लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली दोषी हैं? तो स्वामी का जवाब है कि मैं उनकी मदद करने की कोशिश कर रहा हूं, ताकि हमारे खेमे के दुश्मनों को पहचाना जा सके।

मोदी सरकार को फेल करने की साज़िश!

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कंप्यूटर के ट्रोजन हार्स वायरस का उदाहरण देते हुए कहा है कि सरकार के अंदर बैठे भेदियों की वजह से दो साल में मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के कुछ अहम क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है। स्वामी ने इस बात पर ध्यान दिलाया है कि अरविंद सुब्रह्मण्यम भी सरकार में एनडीटीवी के पसंदीदा लोगों में से एक रहे हैं। लोकसभा चुनाव के वक्त वो अंग्रेजी अखबारों में संपादकीय लिखकर पीएम मोदी की आलोचना किया करते थे। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार में उन्होंने लिखा था कि मोदी के चमत्कार की बातें बहुत बढ़ा-चढ़ाकर की जाती हैं। उन्होंने नीतीश और नवीन पटनायक जैसे मुख्यमंत्रियों को मोदी से बेहतर बताया था और ‘गुजरात मॉडल’ को बकवास करार दिया था। यह रहस्य है कि इसके बावजूद मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर में अरविंद सुब्रह्मण्यम सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कैसे बन गए। कहा जाता है कि उन्हें सलाहकार बनाने के पीछे अरुण जेटली का हाथ था।
फिलहाल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक औपचारिक बयान देकर अरविंद सुब्रह्मण्यम का बचाव किया है।

कौन हैं अरविंद सुब्रह्मण्यम?

रघुराम राजन की तरह अरविंद सुब्रह्मण्यम भी अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली और अहमदाबाद आईआईएम से पढ़ाई की। इसके बाद वो अमेरिका चले गए जहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमफिल और डीफिल किया। 2011 में फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे बेहतरीन विचारकों में से एक माना था। वो अमेरिका के कई नामी शिक्षण संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे हैं।

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