पाकिस्तान का होने वाला है एक और बंटवारा!

क्या पाकिस्तान एक बार फिर से बंटवारे की तरफ बढ़ रहा है? पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान इलाके में हो रही घटनाओं को देखकर तो ऐसा ही लगता है। पहली बार यहां पर बलोच उग्र संगठनों ने हथियारबंद हमले भी शुरू कर दिए हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह चीन की बढ़ती दखलंदाजी को माना जा रहा है। दरअसल पाकिस्तान ने यहां की काफी जमीन चीन को दे दी है, जिससे लोकल लोग भड़के हुए हैं और अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।

भारत-ईरान की करीबी का भी असर

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के दौरे पर गए थे, जहां पर उन्होंने ईरान में चाबहार पोर्ट को डेवलप करने के लिए समझौता किया है। यह बंदरगाह बनने से भारत के लिए खाड़ी देशों के दरवाजे खुल जाएंगे। इस व्यापारिक रास्ते में अफगानिस्तान से ईरान होते हुए रूस और यूरोप तक शामिल हैं। बीच में पाकिस्तान का कोई रोल भी नहीं रहेगा। चाबहार से गुजरात के कांडला पोर्ट की दूरी बहुत कम है। दरअसल पाकिस्तान इसी से बौखलाया हुआ है।

बौखलाहट में चीन को दी बलूचिस्तान की जमीन

भारत और ईरान की करीबी से बौखलाए पाकिस्तान ने चीन को बलूचिस्तान इलाके में 2000 एकड़ जमीन दे दी। यहां पर चीन ग्वादर पोर्ट बना रहा है। 790 किलोमीटर के समुद्र तट वाले ग्वादर इलाके पर चीन की हमेशा से नजर रही है। दरअसल बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों का भंडार छिपा हुआ है। गैस और तेल का तो यहां अब तक ठीक से पता भी नहीं लगाया गया है। पाकिस्तान जब यह काम करने में नाकाम हो गया तो यहां के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का लाइसेंस चीन को दे दिया गया। इस काम के लिए चीन की कंपनियां ग्वादर पोर्ट बना रही हैं। लेकिन उसके इंजीनियरों पर पिछले कुछ दिनों में कई जानलेवा हमले हो चुके हैं। बलूचिस्तान के लोग अपने कुदरती खजाने को ऐसे लूटने देना नहीं चाहते। चीन बलूचिस्तान से बीजिंग तक एक गैस पाइपलाइन भी बिछा रहा है, जिसे वो पूरी तरह अपने इस्तेमाल में लेगा।

चीन की दखल के खिलाफ भड़का आंदोलन

चीन की दखल के बाद पहली बार बलूचिस्तान में हथियारबंद आंदोलन देखने को मिल रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और बलूचिस्तान रिपब्लिकन आर्मी नाम के तीन संगठन इस उग्र आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके का राज्य है। इसकी राजधानी क्वेटा है। बलूचिस्तान की सीमा ईरान और अफगानिस्तान से लगी हुई है। आजादी के बाद बंटवारे के दौरान पाकिस्तान ने इस इलाके के लोगों को जबरन अपने में शामिल कर लिया था। तब से लेकर अब तक यहां के लोगों ने कभी भी पाकिस्तान की गुलामी को स्वीकार नहीं किया। पाकिस्तान की सरकारों ने यहां कभी विकास नहीं होने दिया। कई बड़े बलोच नेताओं की हत्या कर दी गई, जबकि कई दूसरे देशों में रहकर आजादी की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। साल 2000 के बाद से यहां आजादी का आंदोलन तेज़ हुआ है। इसे दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना अब तक 20 हजार से ज्यादा लोगों की हत्याएं कर चुकी है।

भारत का साथ चाहते हैं बलोच लोग

बलूचिस्तान की आबादी पाकिस्तान विरोधी और भारत समर्थक है। क्रिकेट में जब भी पाकिस्तान हारता है तो यहां जश्न मनाया जाता है। बलूचिस्तान के लोग काफी पढ़े-लिखे और संपन्न हुआ करते थे, लेकिन पाकिस्तानी सेना के अत्याचार ने उनके पूरे इलाके को बेहद गरीब बना दिया है। कई बलोच नेता भारत में भी निर्वासित जिंदगी बिता रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए ये लोग भारत से अपील करते हैं कि वह यहां के लोगों की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाए। अब तक भारत ने कभी भी औपचारिक रूप से बलूचिस्तान का मुद्दा नहीं उठाया है। लेकिन जिस तरह से ईरान और भारत की करीबी बढ़ी है उससे पैदा बौखलाहट ने पाकिस्तान में एक और बंटवारे की बुनियाद डाल दी है।


 

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