केजरीवाल जी, उड़ती दिल्ली की चिंता कब करेंगे?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन दिनों पंजाब की बहुत फिक्र है। उन्होंने पंजाब में नशाखोरी को चुनावी मुद्दा बनाया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में यह पंजाब से भी बड़ी समस्या है। दिल्ली में तमाम इलाकों में सड़क के किनारे खुलेआम ड्रग्स लेते लोगों को देखा जा सकता है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार अपनी कमाई बढ़ाने के लिए शराब की दुकानों के नए-नए लाइसेंस जारी कर रही है। इसका नतीजा यह है कि बीते डेढ़ साल में दिल्ली में सड़क हादसों में भारी तेज़ी आई है।

10 महीने में 30% बढ़ी शराब की बिक्री

शराबखोरी को सरकारी बढ़ावा

दिल्ली सरकार अपनी कमाई बढ़ाने के लिए लगभग पूरी तरह से शराब की बिक्री पर निर्भर है। लोगों को खुश करने के लिए इस पर ड्यूटी तो नहीं बढ़ाई गई, लेकिन शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं, ताकि इसकी बिक्री बढ़े और खजाना भरता रहे। पिछले साल अप्रैल से इस साल जनवरी तक सिर्फ शराब की एक्साइज ड्यूटी से दिल्ली सरकार ने 30% ज्यादा यानी 3162 करोड़ रुपये कमाए। अब शराब की नई दुकानें खोलकर इसे 4500 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सबसे खतरनाक बात यह है कि शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए स्कूली बच्चों और महिलाओं को भी टारगेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार शराब पीने की उम्र भी कम करने पर विचार कर रही है। दिल्ली में होने वाले 70% सड़क हादसे शराब की वजह से होते हैं। इनमें से ज्यादातर रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच होते हैं। हर दिन इन हादसों में लोगों की मौत और कई घायल होते रहते हैं।

बेहद आसानी से मिलती है ड्रग्स

दिल्ली देश के कुछ उन शहरों में से एक है जहां आपको गली के मोड़ पर भी ड्रग्स मिल जाएगी। कोकीन, चरस और हेरोइन के अलावा पार्टी ड्रग्स की दिल्ली में भारी डिमांड है। हाल ही में पुलिस ने एक बड़े नाइजीरियाई ड्रग्स गिरोह का भंडाफोड़ किया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों और साउथ दिल्ली की पॉश कॉलोनियों में भी ड्रग्स बेहद आसानी से पाई जा सकती है। कई बार यह भी आरोप लगते हैं कि यह ड्रग्स आम आदमी पार्टी के कुछ लोकल विधायकों की देख-रेख में बिक रही है।

10 साल के ड्रग एडिक्ट बच्चे की कहानी, उसी की जुबानी

दिल्ली में छोटे-छोटे बच्चे आयोडेक्स और टायर-ट्यूब में पंचर सटाने वाले केमिकल से नशा कर रहे हैं। ये बच्चे यमुना बाजार, सराय काले खां ही नहीं, बल्कि कनॉट प्लेस जैसी जगहों पर देखे जा सकते हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने आज तक इनकी परवाह नहीं की। यहां तक कि इन्हें नशामुक्ति केंद्र तक ले जाने का भी कोई इंतजाम दिल्ली सरकार के पास नहीं है। नीचे आप नशे के शिकार एक बच्चे की कहानी देख सकते हैं।

दिल्ली में लोग जगह-जगह बैठे ड्रग एडिक्ट्स के बारे में सोशल मीडिया पर रिपोर्ट करते रहते हैं, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आज तक ऐसे किसी ट्वीट को रीट्वीट नहीं किया।

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