मुसलमान मर्द से शादी के 3 सबसे बड़े खतरे

Sheeba Aslam Fehmi Mujtahidaबहनों मुसलमान मर्द से शादी करने के तीन ख़तरे हो सकते हैं।

एक यह कि आप तीन-तलाक़ की शिकार हो कर बर्बाद हो सकती हैं। उम्र के किसी भी पड़ाव में (आप चाहें 60 साल की क्यूँ न हों) आपको तीन तलाक़ देकर बेसहारा छोड़ दिया जा सकता है। न गुज़ारा भत्ता न कोई और मदद मिलेगी आपको।

दूसरा ये कि आप को सौतन को भी बर्दाश्त करना पड़ सकता है, और इस धोखे के ख़िलाफ़ आप क़ानून का दरवाज़ा भी नहीं खटका सकतीं।

तीसरा ये की अगर आप ने सौतन को बर्दाश्त कर भी लिया तो आपके और सौतन के बच्चों के बीच जायदाद हक़ के झगड़े लाज़िमी हैं। उस पकी उम्र में ये खामखां की टेंशन।

बहनों अगर आप इन छुपे हुए ख़तरों से बचना चाहती हैं तो अपने निकाहनामे में ये शर्त लिखवाइए की आपको तीन तलाक नहीं दिया जाएगा और आपके ज़िंदा रहते दूसरी शादी नहीं करेगा।
जब तक तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह पर क़ानूनी रोक नहीं लग जाती मुसलमान मर्द से सोच-समझ कर शादी कीजिये, इसमें बहुत रिस्क है। इसके खतरे मैं आपको बता चुकी हूं।

शरीफ़ और ख़ुश-इख़लाक़ मुसलमान इस पोस्ट को पसंद करेंगे, लेकिन जो बेईमान मर्द इस्लाम को सिर्फ मर्दों का दीन समझते हैं और जिनके दिलों में अपनी बीवी के लिए इज़्ज़त और वफादारी नहीं है उन्हें तो आग लगनी ही है। ऐसे मर्दों की वजह से ही इस्लाम का नाम बदनाम होता है।
शिया, बोहरा, मेमन, खोज, आग़ा खानी, इस्माइली मुसलमानों में तीन तलाक़ जैसी बुराई नहीं है। इसलिए उनके यहां निकाह-हलाला भी नहीं होता, इन्हीं से कुछ सीख लें सुन्नी भाई।


(यह लेख मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और तीन तलाक़ के खिलाफ आवाज उठाने वाली जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता शीबा असलम फ़हमी के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है। शीबा मीडिया के जरिए काफी समय से मुस्लिम महिलाओं के मुद्दे उठाती रही हैं।)

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