केजरीवाल का मानसिक संतुलन ठीक नहीं, 5 लक्षण

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीति में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे कई लोगों को उनकी दिमागी हालत पर शक हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने लिखा है कि ऐसा लगता है कि केजरीवाल के साथ सबकुछ ठीक नहीं है। आम तौर पर आईआईटी से पढ़ाई करने वाले एक पूर्व ब्यूरोक्रेट से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया से लेकर सरकारी पत्र-व्यवहार तक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया है उससे यह शक और मजबूत होता है। हमने अरविंद केजरीवाल की ऐसी 5 चिट्टियां और ट्वीट लिए और उनकी भाषा के बारे में दिल्ली के एक नामी मनोवैज्ञानिक से बात की। नाम न छापने की शर्त थी, लिहाजा हम उनका नाम जाहिर नहीं कर रहे हैं।

1. उपराज्यपाल नजीब जंग को चिट्ठी (15.06.2016)

इस सरकारी चिट्ठी में सीएम केजरीवाल उपराज्यपाल को न्यौता दे रहे हैं कि वो उनकी सोलर एनर्जी पॉलिसी को लेकर छापे डलवाएं। दरअसल केजरीवाल गुजरात की नकल में दिल्ली में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने की बात कह रहे हैं। लेकिन उनकी स्कीम अब तक जनता को समझ में ही नहीं आई। अब इस स्कीम को पब्लिसिटी दिलाने के लिए उन्होंने शायद यह रास्ता चुना। हमारे मनोवैज्ञानिक के मुताबिक इस चिट्ठी में यही कोशिश झलक रही है।

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2. उपराज्यपाल नजीब जंग को चिट्ठी (13.06.2016)

इस चिट्ठी में एक मुख्यमंत्री उपराज्यपाल से कह रहा है कि आप चाहे कुछ कर लीजिए प्रधानमंत्री आपको उपराष्ट्रपति नहीं बनाएंगे। यह केजरीवाल की निजी चिट्ठी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के लेटरपैड पर लिखी गई औपचारिक चिट्ठी है। हमारे एक्सपर्ट का कहना है कि इस चिट्ठी की भाषा से लगता है कि केजरीवाल ने इसे बहुत गुस्से में लिखा है। साथ ही इसमें उनकी पैरानॉयड पर्सनैलिटी की झलक मिलती है। खास तौर पर यह लिखना कि आप कुछ भी कर लें आपको उपराष्ट्रपति नहीं बनाया जाएगा, इस बात की ओर इशारा करता है कि केजरीवाल के मन में कोई काल्पनिक बात घर कर जाती है और फिर वो उसे सच मानने लगते हैं।

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3. उपराज्यपाल नजीब जंग को चिट्ठी (06.06.2016)

इसमें केजरीवाल ने बताया है कि दिल्ली में जंगलराज है। अपराध की घटनाएं बढ़ रही है। जबकि दरअसल स्थिति इतनी बुरी भी नहीं है जैसा कि मुख्यमंत्री बता रहे हैं। वो चाहते तो सभ्य भाषा में भी यही बातें ज्यादा असरदार तरीके से लिख सकते थे। लेकिन उन्होंने जो शैली अपनाई है वो उनकी दिमागी असंतुलन की तरफ इशारा कर रही है।

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4. 21 विधायकों के फंसने पर बौखलाहट

लाभ के पद मामले में 21 विधायकों की सदस्यता खत्म होने के खतरे ने अरविंद केजरीवाल को मानो बेहद तनाव में डाल दिया। जिस दिन यह खबर आई थी तो एक रिपोर्टर के ट्वीट के जवाब में केजरीवाल ने ऐसी बात कही, जो लोगों को बेहद अजीब लगी। किसी परिस्थिति को ठीक से समझ न पाना और उस पर एक्स्ट्रीम रिएक्शन देना एक तरह की कुंठा और हताशा की तरफ इशारा करता है।

5. मोदी को कायर और साइकोपैथ कहना

सीएम केजरीवाल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेंद्र कुमार पर जब छापे मारे गए थे तो अरविंद केजरीवाल बहुत जल्दी तैश में आ गए थे। उन्होंने दावा करना शुरू कर दिया कि छापे उनके दफ्तर पर मारे गए हैं। केजरीवाल ने इसे लेकर पीएम मोदी को कायर और पागल कहकर संबोधित किया था। एक सम्मानित पद पर होने के बावजूद इस तरह की गाली-गलौज दिमागी असंतुलन और शॉर्ट टेंपर्ड पर्सनैलिटी की ओर इशारा करता है। अक्सर देखा जाता है कि मानसिक समस्याओं वाले व्यक्ति दूसरों को गाली-गलौज देने में अच्छा महसूस करते हैं।

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क्या केजरीवाल पैरानॉयड पर्सनैलिटी हैं?

एक दिमागी बीमारी का नाम है पैरानोइया (Paranoia)। इसके मरीज को हमेशा दूसरों पर शक रहता है और उसे लगता है कि सारे लोग उसके बारे में ही बात कर रहे हैं। ऐसे लोग सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करते हैं। पैरानोइया के मरीज बात पूरी न होने पर गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगते हैं। मोटे तौर पर इनमें से कई लक्षण अरविंद केजरीवाल में भी हैं। ऐसे में बेहतर होता कि वो किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक से मिलें। क्योंकि शायद उससे उनका मन स्थिर हो और वो दिल्ली के लोगों के काम पर और भी ज्यादा फोकस कर पाएं।

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