पानी संकट की खबर छापने पर पत्रकार की नौकरी गई!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के 526 करोड़ के विज्ञापनों का असर अब पत्रकारों की नौकरी पर भी पड़ने लगा है। दैनिक जागरण अखबार के पत्रकार अरविंद कुमार द्विवेदी को सिर्फ इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि उन्होंने दिल्ली के महिपालपुर इलाके में पानी के लिए महिलाओं के बीच मारपीट की खबर दी थी। यह खबर 12 जून के अखबार में छपी थी। जिसके आधार पर अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके जल मंत्री कपिल मिश्रा से रिपोर्ट मांग ली थी।

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जांच के नाम पर कपिल मिश्रा ने सच छिपाया

केजरीवाल के ट्वीट के बाद कपिल मिश्रा ने रिपोर्टर अरविंद कुमार द्विवेदी को बुलाकर जांच पड़ताल शुरू कर दी। कपिल मिश्रा ने उससे कुछ सवाल पूछे। पूरा सवाल और जवाब उन्होंने ट्विटर के जरिए अरविंद केजरीवाल को बता दिया। सवालों को देखने से ऐसा लगता है कि कपिल मिश्रा यह साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि रिपोर्टर मौके पर नहीं गया और जल बोर्ड के अधिकारियों या स्थानीय विधायक से बात नहीं की। लेकिन कपिल मिश्रा बड़ी सफाई से यह बात छिपा गए कि वीडियो सही था और यह दावा भी सही था कि झगड़ा पानी को लेकर ही हुआ था। वीडियो में खाली बाल्टियों और घड़ों की लाइन भी देखी जा सकती है। रिपोर्टर ने दावा किया था कि यह वीडियो उसके स्थानीय सूत्र ने अपने मोबाइल फोन से बनाकर भेजा था। वीडियो के अलावा कई तस्वीरें भी उसे मिली थीं। किसी भी आम रिपोर्टर की तरह उसने अपने सूत्र पर भरोसा किया। कुछ स्थानीय लोगों से बात की और रिपोर्ट फाइल कर दी। आम तौर पर ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय अधिकारियों या नेता का पक्ष नहीं लिया जाता है। नीचे आप कपिल मिश्रा का ट्वीट देख सकते हैं। इसके जवाब में भी कई लोगों ने ट्वीट करके बताया कि पानी संकट की बात सही है, लेकिन मंत्री या सबसे ईमानदार मुख्यमंत्री के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

जनता से अपनी ही अपील भूले केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल अक्सर कहते रहे हैं कि अगर कहीं कुछ गड़बड़ होते देखें तो फौरन वीडियो बनाकर हमें भेज दें। हम उस पर कार्रवाई करेंगे। इस मामले में भी किसी ने समस्या देखी और उसका वीडियो बनाकर रिपोर्टर को भेज दिया। रिपोर्टर ने लोकल लोगों से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट छाप दी। तो इसमें रिपोर्टर की गलती कैसे हो गई? केजरीवाल ने अपने मंत्री की भेजी रिपोर्ट को सच मान लिया और ट्वीट किया कि ‘क्या यह पत्रकारिता है?’ सवाल यह है कि ऐसे ही वीडियो वाले स्टिंग ऑपरेशन करके अरविंद केजरीवाल अब तक लोगों को भ्रष्टाचारी और घूसखोर साबित करते रहे हैं, लेकिन जब बात खुद पर आई तो नियम बदल गए।

केजरीवाल ने रिपोर्टर को नौकरी से निकलवाया

हमारे सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल का यह ट्वीट दैनिक जागरण मैनेजमेंट के लिए इशारा था कि वो दिल्ली में पानी संकट की असली तस्वीर सामने लाने वाले रिपोर्टर को कड़ी सज़ा दें। अरविंद द्विवेदी को दिल्ली से बाहर ट्रांसफर करने को कहा गया, लेकिन जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनका इस्तीफा ले लिया गया।

दैनिक जागरण में लगातार दूसरी घटना

अभी कुछ दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल के दबाव में दैनिक जागरण अखबार मैनेजमेंट ने दिल्ली के ब्यूरो चीफ राजकिशोर को नौकरी से निकाल दिया था। तब भी अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर उन्हें इसलिए बुरा-भला कहा क्योंकि उन्होंने दिल्ली में ऑड-इवेन पॉलिसी की आलोचना की थी। बताया गया था कि उस मामले में केजरीवाल ने जागरण मैनेजमेंट को सीधे-सीधे फरमान सुना दिया था कि या तो वो इस ब्यूरो चीफ को हटाएं या मैं विज्ञापन बंद कर रहा हूं। उस मामले में केजरीवाल का धमकी भरा ट्वीट देखिए।

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मीडिया जगत में चुप्पी, किसी ने आवाज़ नहीं उठाई

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ महीने पहले दिल्ली में सड़कों पर मार्च निकलने वाले पत्रकार इस बार चुप हैं। राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त और रवीश कुमार जैसे पत्रकारों ने अरविंद द्विवेदी के समर्थन में एक ट्वीट तक नहीं किया। किसी को इसमें कुछ भी अजीब नहीं लग रहा कि एक मुख्यमंत्री अखबार के मैनेजमेंट को धमकाकर रिपोर्टर की नौकरी कैसे ले सकता है। कुछ दिन पहले भी केजरीवाल ने दिल्ली सरकार कवर करने वाले कई पत्रकारों को बैन कर दिया था। उस वक्त भी इन तथाकथित बड़े संपादकों ने केजरीवाल के खिलाफ या तो मुंह नहीं खोला था या मुंह खोलने की रस्मअदायगी की थी।


केजरीवाल से क्यों डरता है दैनिक जागरण?

दैनिक जागरण अखबार के मैनेजमेंट का रुख बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं था। क्योंकि मीडिया की दुनिया में इस अखबार के लिए एक कहावत है कि ‘जिसकी सरकार, उसका अखबार’। अखबार को अच्छी तरह एहसास था कि केजरीवाल ने एक फुलपेज विज्ञापन भी खींच लिया तो लाखों का नुकसान हो जाएगा। वैसे भी दिल्ली सरकार दैनिक जागरण की सबसे बड़ी विज्ञापनदाताओं में से है।

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