जानिए केजरीवाल ने क्यों बनाए थे 21 संसदीय सचिव!

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ गई है। उनके 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने का बिल राष्ट्रपति ने नामंजूर कर दिया। दरअसल कोई विधायक पद पर रहते हुए लाभ का कोई दूसरा पद नहीं ले सकता। लेकिन केजरीवाल ने इन विधायकों को मंत्री जैसी शानो-शौकत दिलाने के लिए वो किया, जिसकी उनसे पहले देश के तमाम भ्रष्ट से भ्रष्ट नेता ने कल्पना भी नहीं की थी। देश में करप्शन का ये सबसे अनोखा मामला है, जिसमें एक साथ किसी राज्य के 21 विधायकों को पद गंवाना पड़ेगा। इन विधायकों में अलका लांबा भी शामिल हैं, जिन्हें मंत्री बनाने के लिए केजरीवाल पर काफी दबाव रहा है।

क्यों बनाए गए संसदीय सचिव?

दिल्ली एक छोटा राज्य है, जहां सरकार के तहत बहुत ज्यादा विभाग नहीं हैं। नियमों के मुताबिक यहां मुख्यमंत्री के अलावा कुल 6 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में केजरीवाल ने सोचा कि बाकी विधायकों को भी 3 लाख प्रति माह सैलरी के अलावा सत्ता का पूरा सुख कैसे दिलाया जाए। इसके लिए उन्होंने संसदीय सचिव नाम से एक नया पद बनाया। इस पद पर मिलने वाली सुविधाएं बिल्कुल मंत्रियों जैसी ही थीं। 21 विधायकों ने संसदीय सचिव के पद संभाल भी लिए। उनके लिए आलीशान दफ्तर और गाड़ी वगैरह का भी इंतजाम कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक इन 21 विधायकों का असली काम व्यापारियों से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसे तमाम कामों में अवैध वसूली का था। इन्होंने अपना काम शुरू भी कर दिया, लेकिन तभी मामला खुल गया। इसके बाद केजरीवाल ने सफाई देनी शुरू कर दी कि ये संसदीय सचिव सिर्फ मंत्रियों की मदद कर रहे हैं और उन्होंने किसी सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया। राष्ट्रपति को भेजा बिल वापस होने के बाद भी केजरीवाल ने अपनी यह दलील छोड़ी नहीं।



लाभ के पद पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला

लाभ के पद के मामले में सुप्रीम कोर्ट एक फैसला सुना चुका है, जिसके मुताबिक “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने सुविधाओं का इस्तेमाल किया या नहीं। अगर किसी पद के साथ सुविधाएं हैं तो वह लाभ का पद ही माना जाएगा।” कांग्रेस के नेता अजय माकन का कहना है कि अगर नीयत इतनी ही अच्छी थी तो संसदीय सचिव के पद को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए विधानसभा से बिल क्यों पास करवाया था। क्योंकि बकौल केजरीवाल आम आदमी पार्टी के विधायक सारे अच्छे काम फ्री में ही कर रहे थे।

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यह 13 मार्च का नोटिफिकेशन है, जिसमें साफ लिखा है कि संसदीय सचिव को गाड़ी और ऑफ़िस की सुविधाएं मिलेंगी।

भ्रष्टाचार के नाम पर नेता बने, भ्रष्टाचार में ही फंसे

विधायक रहते हुए लाभ का दूसरा पद लेना एक तरह के भ्रष्टाचार का केस है। यह आर्थिक भ्रष्टाचार से ज्यादा नैतिक भ्रष्टाचार है क्योंकि इसके जरिए विधायकों को मंत्री पद की सुविधाएं दिलाने की कोशिश की गई। केजरीवाल ने यह सब तब किया जबकि वो दावे किया करते थे कि सरकार बनेगी तो बंगला, कार वगैरह नहीं लेंगे। जिन 21 विधायकों पर अयोग्य ठहराए जाने का खतरा है।

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