5 ‘चमचे’ जो मोदी के लिए मुसीबत से कम नहीं

सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने कहा है कि मैं मोदी का चमचा हूं और मुझे इस पर गर्व है। इस बयान से प्रधानमंत्री को तो कोई फायदा होने वाला नहीं, उलटा उन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म को लेकर उठे विवाद से प्रधानमंत्री मोदी को जोड़ दिया। बीते दो साल में प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे कई चमचे सामने आ चुके हैं जिनकी नीयत भले ही गलत न हो, लेकिन वो कुछ न कुछ ऐसी हरकत कर डालते हैं, जिससे शर्मिंदगी मोदी सरकार को उठानी पड़ती है। हम आपके लिए लेकर आए हैं ऐसे ही टॉप-5 चमचों की लिस्ट जो किसी आफत से कम नहीं।

1. पहलाज निहलानी

सेंसर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था तो इस उम्मीद से कि वो बोर्ड में कांग्रेसी चापलूसी के कल्चर को खत्म करेंगे और फिल्मी दुनिया से जुड़े होने की वजह से ज्यादा पेशेवर तरीके से काम करेंगे। पहलाज निहलानी से ज्यादा उम्मीदें इसलिए भी थीं क्योंकि इससे पहले सोनिया गांधी ने बेटी प्रियंका की डांस टीचर लीला सैमसन को सेंसर बोर्ड का चेयरमैन बना रखा था। लेकिन हुआ उम्मीद के बिल्कुल उलट। पहलाज निहलानी बेहद सनकी तरीके से काम करते हैं। बोर्ड के बाकी सदस्य भी उनसे खुश नहीं हैं। ‘उड़ता पंजाब’ से पहले वो जेम्स बॉन्ड की फिल्म में किस का साइज़ कम करने से विवाद में आए थे। तब भी उनकी जमकर फजीहत हुई थी। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ में एक वीडियो फिल्म बनाई थी। इसमें सरकार की तारीफ के लिए जो सीन दिखाए गए थे वो भारत के नहीं, बल्कि दूसरे देशों के थे। इससे भी उनका और सरकार का जमकर मज़ाक उड़ा था।

2. गजेंद्र चौहान

सरकार ने उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (FTII), पुणे का चेयरमैन बनाया। इसे लेकर जब विवाद पैदा हुआ तो गजेंद्र चौहान ने सम्मानजनक तरीके से उनके जवाब देने के बजाय अजीबोगरीब बयान देने शुरू कर दिए थे। कई टीवी शोज़ में जाकर उन्होंने अपनी खूब भद्द भी पिटवाई। गजेंद्र चौहान के चलते एफटीआईआई में छात्र लंबे समय तक हड़ताल पर भी रहे। दरअसल गजेंद्र चौहान ने महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने के अलावा कई सी-ग्रेड फिल्मों में भी काम किया था। इन सबमें उनके सीन सोशल मीडिया पर खूब चटखारे ले-लेकर शेयर किए गए।


3. गिरिराज सिंह

पीएम मोदी से करीबी के चलते उन्हें केंद्र में मंत्री भी बना दिया गया, लेकिन अक्सर वो ऐसे-ऐसे बयान देते रहते हैं जिससे सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। लोकसभा चुनाव के दौरान ही उन्होंने मोदी की आलोचना करने वालों को पाकिस्तान चले जाने की सलाह दे दी थी। इसके बाद उन्होंने यह कह कर कांग्रेस को हमले करने का मौका दे दिया कि अगर राजीव गांधी किसी नाइजीरियाई से शादी करते तो कांग्रेसी उन्हें अपनी नेता नहीं मानते। गिरिराज के इस बयान ने लगातार हार से पस्त कांग्रेस को सरकार पर हमले करने का मौका दे दिया था। एक मंत्री होने के नाते तो उनसे ऐसी बात की उम्मीद कतई नहीं की जाती थी।

4. योगी आदित्यनाथ

यूपी में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं, लेकिन अक्सर बोलने में जुबान फिसल जाती है। योगी बेहतरीन वक्ता हैं, संसद से लेकर सड़क तक प्रधानमंत्री और सरकार का जबर्दस्त बचाव करते हैं। लेकिन समय और मौका भांपने में चूक करते रहते हैं। फिलहाल खुद को जबरदस्ती यूपी के अगले सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट करने में लगे हैं। पार्टी हाइकमान की तरफ से उन्हें इसकी मंजूरी नहीं मिली है, फिर भी सोशल मीडिया के जरिए समर्थकों का कैंपेन जारी रखे हुए हैं।

5. साक्षी महाराज

इन्होंने अपनी इमेज इतनी खराब कर रखी है कि अगर कुछ सही बात कहते हैं तो उसे भी मीडिया विवादित बयान के तौर पर ही दिखाता है। साक्षी महाराज ने गैर-जिम्मेदाराना बयानों का रिकॉर्ड बना रखा है। मीडिया को जब भी सरकार के अच्छे कामों से ध्यान बंटाना होता है वो साक्षी महाराज के पास एक रिपोर्टर भेज देते हैं। उसके बाद महाराज जी कुछ न कुछ ऐसा बक देते हैं जिसे लेकर टीवी चैनल वाले 3-4 दिन तक खींचते रहते हैं। सांसद हैं, लिहाजा इनकी हरकतों पर कई बार पार्टी को सफाई देनी पड़ी है।

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