यूपी चुनाव में ये है अमित शाह का ‘प्लान-डी’

लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा में भी मायावती को बेअसर करने के लिए अमित शाह ने एक प्लान तैयार किया है। इसके तहत मायावती को नापसंद करने वाले दलितों को एकजुट किया जाएगा। इस प्लान की सबसे अहम कड़ी होंगे बौद्ध भिक्षु जिन्हें अभी से पूरे उत्तर प्रदेश में प्रचार का जिम्मा सौंपा जा चुका है। इसके लिए एक रथनुमा बस तैयार की गई है। जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तस्वीर है। यात्रा का संदेश है- मायावती को हटाना, मोदी जी को लाना।


बीजेपी के पक्ष में धम्म चेतना यात्रा

वाराणसी के सारनाथ से यह यात्रा 24 अप्रैल को निकली है जो पूरे प्रदेश में घूमकर 14 अक्टूबर को लखनऊ में खत्म होगी। तब पीएम मोदी खुद वहां होने वाली एक रैली को संबोधित करेंगे। इस यात्रा की अगुवाई अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ के प्रमुख धम्म विरियो महातरा कर रहे हैं। ये लोग घूम-घूम कर भगवान बुद्ध और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का संदेश दलित समाज तक पहुंचाएंगे।


बौद्ध धर्म में मोदी की अच्छी पकड़

उत्तर प्रदेश में जात-पात की परेशानियों से तंग आकर बड़ी तादाद में दलितों ने बीते कुछ सालों में बौद्ध धर्म अपनाया है। बौद्ध संगठनों की चिंता यह है कि ईसाई और मुस्लिम संगठनों की नजर भी दलितों का धर्मांतरण करवाने पर रहती है। इसके लिए उन पर पैसे का लालच देने का आरोप भी लगता रहा है। बौद्ध धर्म के बड़े नेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी संबंध रहे हैं। जापान यात्रा के दौरान भी वो बौद्ध धर्म के बड़े मठों में गए थे। इसके अलावा पीएम मोदी की पहल पर ही पिछले साल सितंबर में दिल्ली में हिंदू-बौद्ध सम्मेलन करवाया था, जिसमें दुनिया भर के तमाम देशों के बौद्ध धर्म गुरु पहुंचे थे। मोदी की कोशिश है कि सनातनी परंपरा के धर्म होने के नाते हिंदुओं और बौद्धों के बीच संवाद होना चाहिए। मोदी की इन तमाम कोशिशों का बौद्ध धर्मावलंबियों के बीच बहुत सकारात्मक असर पड़ा है।


गैर-जाटव दलितों में मायावती से नाराजगी

मायावती भले ही खुद को दलितों की नेता बताती हैं, लेकिन उन पर अक्सर यह आरोप लगते रहते हैं कि सत्ता में आने पर वो जाटव जाति से ताल्लुक रखने वाले दलितों को ही ज्यादा तवज्जो देती हैं। जाटव ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं। इसके अलावा मायावती की शाही लाइफस्टाइल को लेकर भी दलितों के एक वर्ग में बहुत नाराजगी है। इन्हीं वजहों से लोकसभा चुनाव में दलितों ने बड़ी संख्या में बीजेपी को वोट दिया था। अमित शाह की कोशिश उस ट्रेंड को एक बार फिर से दोहराने की है।

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