20 साल बाद दिखा पानी में डूबा गायकवाड़ का किला

बायीं तस्वीर हाल में खींची गई है। दायीं तस्वीर किले के पुराने वैभव को दर्शा रही है।

गुजरात में तापी जिले के पास डैम में डूब चुके गायकवाड़ का ऐतिहासिक किला लंबे अरसे बाद दिखाई दिया है। करीब 20 साल बाद डैम में पानी का लेवल इतना नीचे चला गया है कि इसमें डूबी हुई किले की दीवारें बाहर से दिखने लगी हैं। इससे पहले 1996-97 में भी वाटर लेवल इतना नीचे गया था कि इसकी दीवारें दिखने लगी थीं। उकाई डैम बनने के बाद से ये दूसरा मौका है जब ऐसा हुआ है। इसे देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग पहुंच रहे हैं।

पानी के नीचे है इतिहास की विरासत

जब उकाई डैम बना था तो गायकवाड़ राजाओं की यह राजधानी इसके डूब क्षेत्र में आ गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि किले की दीवारों पर रखीं तोपें और दूसरे कई स्ट्रक्चर पानी के अंदर चले गए। किला इतना मजबूत और आलीशान है कि पानी भरने के बावजूद यह आज भी जस का तस खड़ा है। हालांकि डैम बनने के वक्त ही किला काफी हद तक खंडहर में बदल चुका था। लेकिन पानी भरने के बाद भी किले की दीवारें जस की तस खड़ी हैं। इस बात पर हैरत जताई जा रही है कि 20 साल बाद जब पानी कम हुआ है तब भी तोपें और दीवारें जस की तस दिख रही हैं।

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करीब 300 साल पुराना है ये किला

सोनगढ़ किले के नाम से मशहूर यह किला गायकवाड़ राजाओं का मुख्य महल था। पिलाजीराव गायकवाड़ ने 1719 में भीलों से पहाड़ जीतकर यहां पर ये आलीशान किला बनवाया था। यह 1729 में बनकर तैयार हुआ था। किले का मुख्य हिस्सा इसी पहाड़ पर बना हुआ है। पहाड़ पर बनाने की वजह यही थी कि दुश्मन के लिए इस किले पर जीत हासिल करना आसान न हो। किले की दीवार पर बड़ी-बड़ी तोपें और पत्थर फेंकने की जगहें बनी हैं ताकि चढ़ाई करने वाले किसी दुश्मन को धकेला जा सके। कभी यह किला गुजरात के सबसे आलीशान किलों में से एक हुआ करता था।

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