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बिजली कंपनियों से केजरीवाल की ‘सेटिंग’ हो गई है!

दिल्ली में बिजली संकट और कंपनियों के रवैये को देखते हुए यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुरानी सरकारों की तरह अरविंद केजरीवाल सरकार की भी बिजली कंपनियों के साथ सेटिंग हो गई है। दरअसल दिल्ली में बिजली कटौती बीते सालों से भी अधिक हो रही है। इसके बावजूद केजरीवाल सरकार ने बयानबाजी के अलावा एक भी ऐसा कदम नहीं उठाया, जिससे बिजली कंपनियों को कोई दिक्कत हो।

दिल्ली बिजली एक्ट को भूल गए केजरीवाल?

  • केजरीवाल जब मुख्यमंत्री थे तब वो अक्सर दिल्ली बिजली एक्ट के प्रावधानों को याद दिलाया करते थे। एक्ट में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनसे बिजली कंपनियों की मनमानी रोकी जा सकती है। लेकिन उनमें से एक पर भी अब तक अमल नहीं किया गया है। दरअसल दिल्ली बिजली एक्ट 2003 में साफ-साफ कहा गया है कि
  • बिजली कंपनियों में कॉम्पिटीशन होना चाहिए। चुनाव से पहले केजरीवाल इस पर जोर दिया करते थे, लेकिन सीएम बनने के बाद से उन्होंने इसका जिक्र तक नहीं किया।
  • धारा 60 के मुताबिक सिर्फ एक कंपनी होने से बिजली सप्लाई की क्वालिटी खराब रहने का डर है। अगर कोई कंपनी एकाधिकार का गलत फायदा उठा रही है तो इस धारा के इस्तेमाल से उसे रोका जा सकता है।
  • धारा 61 के मुताबिक ग्राहक को अच्छी क्वालिटी बिजली मिलनी चाहिए, जिसमें कम वोल्टेज या फ्लक्चुएशन न हो।


बिजली कंपनियों पर जुर्माने की बात झूठी

पिछले दिनों केजरीवाल सरकार ने बड़े जोरशोर से एलान किया था कि दिल्ली में अगर किसी इलाके में 2 घंटे से ज्यादा बिजली गायब रहती है तो कंपनी को उसके बदले ग्राहक को जुर्माना देना होगा। लेकिन दरअसल यह बयान मीडिया और जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए था। क्योंकि अभी कोई ऐसा मेकेनिज्म ही नहीं है जिससे बिजली कंपनियों पर जुर्माना लग सके। कटौती की मॉनीटरिंग के लिए जो मीटर आते हैं वो काफी महंगे हैं, ऐसे में यह कैसे संभव है कि कोई अपने पुराने मीटर हटवाकर नए महंगे मीटर लगवाए।

बिजली कंपनियों को बचा रहे हैं केजरीवाल

अभी पिछले साल तक केजरीवाल बात-बात पर धमकी दिया करते थे कि अगर बिजली कंपनी ठीक से सप्लाई नहीं दे पा रही हैं तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। लेकिन अब वो ऐसा नहीं कहते। पिछले दिनों बिजली के मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कई बातों पर बिजली कंपनियों का बचाव करना भी शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों के लिए हमारे डंडे में कोई कमी नहीं है, लेकिन सच्चाई यही है कि दिल्ली में 6 से 8 घंटे कटौती हो रही है और अब तक केजरीवाल ने डंडा ना जाने क्यों आलमारी में बंद कर रखा है। क्या मान लें कि बकौल केजरीवाल जिस वजह से शीला दीक्षित बिजली कंपनियों की एजेंट बन गई थीं, वही वजहें अब खुद उन पर भी लागू हो गई हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि दिल्ली में बिजली कंपनियों की ‘कृपा’ अब आम आदमी पार्टी पर भी बरसने लगी है?

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