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मोदी ने इन बड़े लोगों की ‘मिठाई’ बंद करवाई है!

5. ललित मोदी: असलियत यही है कि यूपीए सरकार ललित मोदी को बचाती रही है। इसीलिए उसे एक भी केस में आरोपी नहीं बनाया गया था। पहली बार ईडी ने ललित मोदी को भारत लाने के लिए इंटरपोल से औपचारिक तौर पर मदद मांगी है। ललित मोदी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। सरकारी एजेंसियां बिना किसी मीडिया पब्लिसिटी के काम जारी रखे हुए हैं। अगर ललित मोदी को भारत लाने में कामयाबी मिल गई तो कांग्रेस के कई नेताओं के लिए मुंह छिपाना मुश्किल हो जाएगा।

6. विजय माल्या: मीडिया ने विजय माल्या के भागने का ठीकरा भले ही मोदी सरकार पर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन असलियत यही है कि खुद मीडिया इस कीचड़ में सनी हुई है। इसीलिए माल्या ने ट्वीट करके मीडिया समूहों को धमकी दी थी। मनमोहन सरकार के वक्त में विजय माल्या को बिना किसी बैंक गारंटी अनाप-शनाप लोन दिलवाए गए थे। इस बात के सबूत जुटाए जा चुके हैं। ईडी की जांच तेज़ी से चल रही है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया उसे दीवालिया घोषित कर चुका है। इसे सरकारी एजेंसियों की चूक मानेंगे कि वो देश से भागने में कामयाब हो गया, लेकिन माल्या को भी पता है कि ऐसा करके उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

7. एनडीटीवी: बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ लंबे समय तक प्रोपोगेंडा करने वाले चैनल एनडीटीवी की भी मिठाई बंद है। एनडीटीवी ने जिस तरह से बड़े पैमाने पर धांधली की हैं, उनकी पहली बार जांच कराई गई। ईडी ने फेमा (FEMA) कानून के उल्लंघन का 2030 करोड़ रुपये का केस कंपनी पर ठोंक रखा है। केस जारी है और मेनस्ट्रीम मीडिया इस पर चुप्पी साधे हुए है। कानूनी प्रक्रिया अपना टाइम लेती है, फैसला आने का इंतजार करना होगा। हैरत नहीं होना चाहिए अगर कल सुब्रत रॉय सहारा की तरह डॉ. प्रणय रॉय के लिए भी तिहाड़ जेल में अलग कमरे का बंदोबस्त करना पड़े।

8. पी चिदंबरम: तमाम घोटालों के केंद्र में रहकर भी चिदंबरम अपनी चालाकी से अब तक इनसे बचते आए हैं। लेकिन कुछ मामलों में उन्होंने भी चूक की हैं। बेटा कार्ति चिदंबरम 2जी केस में बुरी तरह फंसा हुआ है। कई दूसरे घोटालों में भी कार्ति का नाम जांच के दायरे में है।

9. दाऊद इब्राहिम: दुबई जाकर मोदी ने दाऊद के बिजनेस को बहुत करारी चोट दी है। छोटा राजन वापस भारत आ चुका है और उसे दाऊद के खिलाफ खबरी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। दुबई और दुनिया भर में दाऊद के कई एकाउंट सील किए गए हैं। हालत ये है कि दाऊद को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार डर महसूस किया और उसे कराची के बंगले से हटाकर कहीं और ले जाया गया है।

10. कलानिधि मारन: कोर्ट-कचहरी के दम पर डीएमके नेता कलानिधि मारन अब तक जेल जाने से बचे हुए हैं। मारन पर अपने घर पर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने का आरोप है। केस में जांच चल रही है और इन पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है।

11. तीस्ता सेतलाड: मोदी विरोध के नाम पर धंधा चमकाने वालों में तीस्ता सेतलवाड का नाम सबसे आगे है। तीस्ता ने फोर्ड फाउंडेशन से करोड़ों रुपये फंड हासिल किए और उसे अपनी सुख-सुविधा और दूसरे निजी कामों पर खर्च किए। कांग्रेस सरकार के दौर में उन्हें पूरी आजादी थी। लेकिन मोदी के आने के बाद उनके एनजीओ को मिले करोड़ों रुपयों की जांच हो रही है।किसी तरह से कानूनी दांवपेच के दम पर अब तक जेल जाने से बची हुई हैं।

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