मोदी ने इन बड़े लोगों की ‘मिठाई’ बंद करवाई है!

कतर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मिठाई की जिद करने वाले बच्चे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि “जैसे बच्चे को मिठाई की आदत लग जाती है तो मां को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। मां कितना भी मिठाई को छिपा दे बच्चा कुछ न कुछ करके उसे ढूंढ ही लेता है। मां बच्चे को मिठाई खाने ही न दे तो बच्चा बहुत गुस्सा होता है। कुछ उसी तरह मैंने भी कुछ लोगों की मिठाई बंद की है।” यह मिसाल अपने आप में काफी कुछ कहती है। जो लोग ये मिठाई खा रहे थे वो भी समझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री क्या कह रहे हैं। दरअसल मोदी अपने पिछले कई भाषणों में कह चुके हैं कि मैंने जिन लोगों की लूट बंद करवाई है, वो तो मुझे बुरा-भला कहेंगे ही। हम आपको बताते हैं कि वो कौन से बड़े लोग हैं जिनकी मिठाई मोदी सरकार अब तक बंद करा चुकी है।

1. सोनिया गांधी: देश में भ्रष्टाचार और सरकारी लूट की धुरी बन चुका गांधी परिवार सबसे मुश्किल में है। इसकी मुखिया सोनिया गांधी नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी बन चुकी हैं और जमानत पर हैं। कोर्ट में केस की नियमित सुनवाई हो रही है। मीडिया इस केस में बिल्कुल चुप है और कोई भी बड़ा अखबार या चैनल इसकी खबरें नहीं दिखा रहा। इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट भी इस केस की जांच कर रहा है। उसका फंदा भी सोनिया के गले पर है। अगस्ता वेस्टलैंड केस में रिश्वत बेहद सफाई से ली गई है और नई सरकार बनने से पहले कई फाइलें और सबूत जलाए जा चुके हैं। फिर भी सरकार का दावा है कि काफी सबूत तलाश लिए गए हैं और जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी। सोनिया के खिलाफ दोनों मामले कोर्ट में हैं और हमें यह समझना होगा कि अदालतें अपनी ही रफ्तार से काम करती हैं।

2. रॉबर्ट वाड्रा: हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और लंदन में वाड्रा के जमीन सौदे जांच के दायरे में हैं। हरियाणा और राजस्थान में पाया गया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने बेहद सफाई के साथ कानून तोड़ा है। कोर्ट से उसे सजा दिलाने के लिए बहुत फूंक-फूंककर कदम रखने की जरूरत है और सरकार इस काम में लगी है। हरियाणा सरकार की जांच जारी है।

3. राहुल गांधी: मां सोनिया के साथ राहुल भी नेशनल हेराल्डकेस के आरोपी हैं। राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता रखने का मामला भी इसी दौरान उठा है। यह केस भी जल्द ही कोर्ट में जाने की उम्मीद है। वहां पर राहुल गांधी सिर्फ इतना कहकर नहीं बच सकेंगे कि क्लेरिकल मिस्टेक की वजह से उन्हें ब्रिटिश नागरिक लिखा गया था। इस केस में आगे क्या करना है, इसका फैसला पीएम मोदी को करना है।

4. शाहरुख ख़ान: रोज़ वैली चिटफंड कंपनी के चेयरमैन गौतम कुंडू का मामला कम लोग ही जानते होंगे। गौतम कुंडू IPL में शाहरुख की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स का पार्टनर है। बंगाल और उड़ीसा में लाखों लोगों के पैसे ठगने के आरोप में उसे ईडी ने गिरफ्तार कर रखा है। ईडी ने इस केस में शाहरुख को भी नोटिस भेजे, शाहरुख ने बहुत दिन तक ध्यान नहीं दिया। आखिरकार उन्हें पूछताछ के लिए आना पड़ा। मामले पर तेज़ी से काम चल रहा है और पिछले महीने चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। जब ये केस शुरू हुआ था तभी शाहरुख को अचानक लगने लगा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है।

5. ललित मोदी: असलियत यही है कि यूपीए सरकार ललित मोदी को बचाती रही है। इसीलिए उसे एक भी केस में आरोपी नहीं बनाया गया था। पहली बार ईडी ने ललित मोदी को भारत लाने के लिए इंटरपोल से औपचारिक तौर पर मदद मांगी है। ललित मोदी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। सरकारी एजेंसियां बिना किसी मीडिया पब्लिसिटी के काम जारी रखे हुए हैं। अगर ललित मोदी को भारत लाने में कामयाबी मिल गई तो कांग्रेस के कई नेताओं के लिए मुंह छिपाना मुश्किल हो जाएगा।

6. विजय माल्या: मीडिया ने विजय माल्या के भागने का ठीकरा भले ही मोदी सरकार पर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन असलियत यही है कि खुद मीडिया इस कीचड़ में सनी हुई है। इसीलिए माल्या ने ट्वीट करके मीडिया समूहों को धमकी दी थी। मनमोहन सरकार के वक्त में विजय माल्या को बिना किसी बैंक गारंटी अनाप-शनाप लोन दिलवाए गए थे। इस बात के सबूत जुटाए जा चुके हैं। ईडी की जांच तेज़ी से चल रही है और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया उसे दीवालिया घोषित कर चुका है। इसे सरकारी एजेंसियों की चूक मानेंगे कि वो देश से भागने में कामयाब हो गया, लेकिन माल्या को भी पता है कि ऐसा करके उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

7. एनडीटीवी: बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ लंबे समय तक प्रोपोगेंडा करने वाले चैनल एनडीटीवी की भी मिठाई बंद है। एनडीटीवी ने जिस तरह से बड़े पैमाने पर धांधली की हैं, उनकी पहली बार जांच कराई गई। ईडी ने फेमा (FEMA) कानून के उल्लंघन का 2030 करोड़ रुपये का केस कंपनी पर ठोंक रखा है। केस जारी है और मेनस्ट्रीम मीडिया इस पर चुप्पी साधे हुए है। कानूनी प्रक्रिया अपना टाइम लेती है, फैसला आने का इंतजार करना होगा। हैरत नहीं होना चाहिए अगर कल सुब्रत रॉय सहारा की तरह डॉ. प्रणय रॉय के लिए भी तिहाड़ जेल में अलग कमरे का बंदोबस्त करना पड़े।

8. पी चिदंबरम: तमाम घोटालों के केंद्र में रहकर भी चिदंबरम अपनी चालाकी से अब तक इनसे बचते आए हैं। लेकिन कुछ मामलों में उन्होंने भी चूक की हैं। बेटा कार्ति चिदंबरम 2जी केस में बुरी तरह फंसा हुआ है। कई दूसरे घोटालों में भी कार्ति का नाम जांच के दायरे में है।

9. दाऊद इब्राहिम: दुबई जाकर मोदी ने दाऊद के बिजनेस को बहुत करारी चोट दी है। छोटा राजन वापस भारत आ चुका है और उसे दाऊद के खिलाफ खबरी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। दुबई और दुनिया भर में दाऊद के कई एकाउंट सील किए गए हैं। हालत ये है कि दाऊद को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार डर महसूस किया और उसे कराची के बंगले से हटाकर कहीं और ले जाया गया है।

10. कलानिधि मारन: कोर्ट-कचहरी के दम पर डीएमके नेता कलानिधि मारन अब तक जेल जाने से बचे हुए हैं। मारन पर अपने घर पर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने का आरोप है। केस में जांच चल रही है और इन पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है।

11. तीस्ता सेतलाड: मोदी विरोध के नाम पर धंधा चमकाने वालों में तीस्ता सेतलवाड का नाम सबसे आगे है। तीस्ता ने फोर्ड फाउंडेशन से करोड़ों रुपये फंड हासिल किए और उसे अपनी सुख-सुविधा और दूसरे निजी कामों पर खर्च किए। कांग्रेस सरकार के दौर में उन्हें पूरी आजादी थी। लेकिन मोदी के आने के बाद उनके एनजीओ को मिले करोड़ों रुपयों की जांच हो रही है।किसी तरह से कानूनी दांवपेच के दम पर अब तक जेल जाने से बची हुई हैं।

12. ग्रीनपीस: देश में जब भी कोई बिजली घर या विकास का कोई भी प्रोजेक्ट शुरू होता था तो उसके विरोध में आंदोलन शुरू हो जाते थे। इन आंदोलनों को मीडिया में जमकर पब्लिसिटी मिलती थी और सबको लगता था कि सचमुच में कोई बहुत गलत काम हो रहा है। ग्रीनपीस के ही चलते कुडनकुलम परमाणु बिजली घर जैसी योजनाओं में काफी देरी हुई थी। यह साबित हो चुका है कि यह संस्था भारत में विरोध-प्रदर्शन और विकास के कामों को रुकवाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इस बात को मनमोहन सिंह भी जानते थे, लेकिन किसी दबाव में वो कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। पहली बार ग्रीनपीस पर लगाम कसी गई है। इसका लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया गया। हालांकि ग्रीनपीस ने कोर्ट से स्टे ले रखा है। ग्रीनपीस पर सख्त नज़र है और फिलहाल वो भारत में विध्वंसकारी गतिविधियों को फंडिंग नहीं कर पा रही है।

13. फोर्ड फाउंडेशन: यह आरोप लगाया जाता है कि देश के लोकतांत्रिक सिस्टम को धराशाई करने की नीयत से ही फोर्ड फाउंडेशन ने अरविंद केजरीवाल को खड़ा किया था। अन्ना आंदोलन भी फोर्ड फाउंडेशन के पैसे पर ही शुरू हुआ था। ये अमेरिकी संस्था दशकों से कई भारतीय एनजीओ को करोड़ों रुपये दे रही है। जब जांच की गई तो पाया गया कि ज्यादातर एनजीओ लोगों की भलाई के बजाय कभी पर्यावरण तो कभी मानवाधिकार के बहाने नक्सलवाद और आतंकवाद को हवा देने में जुटे हैं। फोर्ड फाउंडेशन से पैसे लेने वाले कई एनजीओ से हिसाब मांगा गया है। इनकी गतिविधियों पर भी लगाम लगाई जा चुकी है।

14. ममता बनर्जी: शारदा घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता जेल की हवा खा चुके हैं। सीबीआई की जांच तेज़ी से चल रही है। ममता बनर्जी के लिए यह मामला सिरदर्द बना हुआ है और कोर्ट केस के दौरान उनके तक इसकी आंच पहुंचना तय है।

15. वीरभद्र सिंह: बेहिसाब जायदाद और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हिमाचल के सीएम बुरी तरह फंसे हुए हैं। हाई कोर्ट ने उन्हें जेल जाने से तो बचा लिया, लेकिन जांच चल रही है।

16. अशोक गहलोत: राजस्थान में करोड़ों के एंबुलेंस घोटाले में अशोक गहलोत जांच के दायरे में हैं। इस केस में सचिन पायलट का भी नाम है। सीबीआई की जांच एडवांस स्टेज में है।


17. शशि थरूर
: सुनंदा पुष्कर केस को यूपीए सरकार लगभग बंद कर चुकी थी। मोदी सरकार आने के बाद मामले की फाइल फिर से खोली गई है। फोरेंसिक जांच से इस बात के संकेत मिले हैं कि सुनंता की हत्या की गई है। शक उनके पति और कांग्रेस नेता शशि थरूर पर है। नजर रखना होगा कि पुलिस की जांच में क्या नतीजा निकलता है। क्योंकि अगर इसमें थरूर को आरोपी बनाया गया तो इसके लिए पुख्ता सबूतों की जरूरत होगी।

18. मायावती: यूपी में 5000 करोड़ रुपये के NRHM घोटाले में सीबीआई मायावती से पिछले साल अक्टूबर में पूछताछ कर चुकी है। इस घोटाले में बाबूलाल कुशवाहा जैसे मायावती के ही कई पुराने करीबी खुलकर बोलने लगे हैं। जिससे मायावती पर शिकंजा कसा हुआ है।

19. जयललिता: यह महज इत्तेफाक नहीं कि 1990 से चल रहे केस में जयललिता को मोदी-राज में ही सजा सुनाई गई। फिलहाल उन्हें हाई कोर्ट से राहत मिली हुई है, लेकिन केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। तमिलनाडु की राजनीति की इस अम्मा की गर्दन पर लटकी तलवार अभी हटी नहीं है।

20. एचएसबीसी: कुछ समय पहले स्विस लीक मामले में व्हिसिलब्लोओर ने बताया था कि HSBC बैंक भारतीयों की ब्लैकमनी विदेशों में ट्रांसफर करने में मदद कर रहा है। उसके बाद से ही इस बैंक पर शिकंजा कस गया था। फिलहाल HSBC बैंक ने भारत में अपने प्राइवेट बैंकिंग ऑपरेशंस बंद कर दिए हैं। बाकी आप खुद समझ सकते हैं कि ऐसी मजबूरी क्यों आई हुई होगी।

न्यायपालिका की सुस्ती है बड़ी चुनौती

हम सभी जानते हैं कि देश में अदालतें फैसले लेने में सालों-साल लगा देती हैं। कई बार किसी पर सख्ती करो तो वो कोर्ट से स्टे ले आता है। भ्रष्टाचार के तमाम मामलों में शुरुआत हुई है और उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले 2 से 4 साल में फैसले आने शुरू हो जाएंगे। आप खुद समझ सकते हैं कि भ्रष्टाचारियों के लिए बुरे दिनों की असली शुरुआत तभी होगी।

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