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दो चाचाओं के झगड़े में हुअा मथुरा में ‘महाभारत’

मथुरा में खूनी खेल खेलने वाले पागल नेता रामवृक्ष यादव का समाजवादी एंगल सामने आ रहा है। पता चला है कि 14 मार्च 2014 को रामवृक्ष जब अपने समर्थकों के साथ मथुरा पहुंचा था तो डीएम और एसएसपी ने उसे वहां तंबू लगाने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद रामवृक्ष ने समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता को फोन किया। थोड़ी ही देर में प्रमुख सचिव स्तर के एक अधिकारी का फोन आया और जवाहर बाग 2 दिन के लिए रामवृक्ष और उसके चेलों के नाम एलॉट हो गया। यूपी के पूर्व डीजी बृजलाल ने भी ऐसे तमाम दावों की पुष्टि की है।

झगड़े के पीछे रामगोपाल-शिवपाल की लड़ाई!

जय गुरुदेव नाम से मशहूर बाबा की मौत के बाद उनकी करोड़ों की संपत्ति को लेकर उनके 3 चेलों पंकज यादव, रामवृक्ष यादव और उमाकांत तिवारी के बीच विवाद हो गया। कहा जाता है कि जय गुरुदेव ने देश भर में फैले अपने भक्तों से जुटाए चंदे और सरकारी जमीनों पर कब्जा करके 15 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। चेलों के झगड़े के बीच फायदा उठाया अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने। शिवपाल ने एक चेले पंकज यादव को अपना मोहरा बना लिया और उसके जरिए जय गुरुदेव की सारी संपत्ति हड़प ली। पंकज यादव बाबा जय गुरुदेव का ड्राइवर हुआ करता था। आश्रम का मुखिया बनने के बाद पंकज यादव ने रामवृक्ष यादव को आश्रम से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

रामगोपाल का करीबी था रामवृक्ष यादव

2014 में लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद सीट से रामगोपाल यादव का बेटा अक्षय खड़ा हुआ था। चुनाव में रामवृक्ष यादव ने अपने करीब 3000 चेलों के साथ अक्षय की खूब मदद की। अक्षय के जीतने में रामवृक्ष का बड़ा योगदान माना जाता है। इसके बाद रामगोपाल और रामवृक्ष में करीबी बढ़ गई। इसके बाद रामवृश्र ने मथुरा के जवाहरबाग में बागवानी विभाग की 280 एकड़ सरकारी जमीन हथियाने का प्लान बनाया। इसी के तहत उसने बाग पर समर्थकों के साथ जाकर डेरा डाल दिया। ऐसा बताया जा रहा है कि तब रामगोपाल यादव ने ही उस वक्त के डीएम और एसएसपी को फोन करके जगह देने को बोला था। इसके बाद रामवृक्ष वहीं पर जमकर बैठ गया। अधिकारियों को उसकी रामगोपाल यादव से करीबी का पता था, इसलिए किसी ने उस पर सख्ती करने की कोशिश नहीं की। धीरे-धीरे उसने यहां ब्यूटी पार्लर, आटा चक्की जैसे तमाम काम-धंधे भी शुरू करवा दिए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने हाई कोर्ट में अपील कर दी और कोर्ट के ऑर्डर के बाद प्रशासन को कब्जा हटवाने की कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।


रामवृक्ष ने बनाई थी हथियारबंद सेना

यह बात भी सामने आई है कि रामवृक्ष आजाद हिंद फौज की तर्ज पर हथियारबंद सेना बना रहा था। इन सभी ने लोकसभा चुनाव में रामगोपाल यादव के बेटे के लिए काम भी किया था। थानाध्यक्ष संतोष यादव के सिर में गोली मारने वाला शार्प शूटर भी इन्हीं में से एक था। चश्मदीदों के मुताबिक वो लाल टी-शर्ट पहने एक पेड़ पर बैठकर गोली चला रहा था।

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