मोदी के स्विट्जरलैंड जाने पर ये बेचैनी क्यों हैं?

पीएम मोदी आज 6 दिनों में 5 देशों के दौरे पर रवाना हुए। इस प्रोग्राम में उन्हें अमेरिका के अलावा स्विट्जरलैंड भी जाना है। पीएम स्विट्जरलैंड क्यों जा रहे हैं इस बात को लेकर सियासी हलकों में अच्छी खासी बेचैनी देखने को मिल रही है। खास तौर पर कांग्रेस और मौके-बेमौके उसकी मदद करने वाली रीजनल पार्टियों के नेता अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं। मोदी की विदेश यात्राओं पर चुटकुलेबाजी करने वाले नेताओं के हलक भी सूखते दिख रहे हैं।

विपक्षी नेताओं के बहके-बहके बयान

पीएम के स्विट्जरलैंड जाने पर सबसे अजीब बयान दिया है जेडीयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में केसी त्यागी ने कहा कि मोदी को स्विट्जरलैंड जाने की कोई जरूरत नहीं थी, विदेशों में छुपाया काला धन लाने का काम वो दिल्ली से भी कर सकते थे। इसी तरह कांग्रेस के नेताओं ने भी यात्रा के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। सवाल यह है कि जब ब्लैकमनी का मुद्दा इन पार्टियों के लिए इतना ही अहम है तो वो इस सवाल पर हमारे प्रधानमंत्री के वहां जाकर सीधे बातचीत करने से इतना डर क्यों रहे हैं।

ब्लैकमनी पर स्विस राष्ट्रपति से सीधी बात

पीएम मोदी कल यानी 5 जून को स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में होंगे। यह पहली बार होगा जब भारत का प्रधानमंत्री स्विट्जरलैंड के राष्ट्राध्यक्ष से आमने-सामने बैठकर वहां के बैंकों में काला धन जमा करने वाले भारतीयों की लिस्ट मांगेगा। स्विट्जरलैंड अभी कनाडा, जापान समेत दुनिया के कुछ देशों को अपने यहां खाता खोलने वालों की लिस्ट दे चुका है। मोदी चाहते हैं कि ऐसा ही समझौता भारत के साथ भी हो जाए।
स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात के फौरन बाद वो जिनेवा चले जाएंगे। जहां उनकी कारोबारियों और बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात होगी। वहां वो CERN लैब में काम करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों से भी मिलेंगे।

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