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हेमा को टारगेट कर मीडिया ने अखिलेश को बचाया!

मथुरा में पिछले दिनों हुई हिंसा के बाद मीडिया के एक तबके ने जिस तरह सांसद हेमामालिनी को टारगेट किया वो चौंकाने वाला था। हमले के अगले दिन जब दिल्ली के ज्यादातर चैनलों के पत्रकार भी मथुरा नहीं पहुंच पाए थे, सबने इस बात पर हंगामा मचाना शुरू कर दिया कि हेमामालिनी कहां हैं? दरअसल हेमामालिनी अपने तय शेड्यूल के मुताबिक मुंबई के पास मड आइलैंड में शूटिंग कर रही थीं। लेकिन इसे ऐसे दिखाया गया मानो मथुरा जल रहा है और हेमामालिनी मौज कर रही हैं। अब हेमामालिनी ने मीडिया के इस रवैये पर जोरदार पलटवार किया है।

हेमामालिनी ही क्यों, अखिलेश क्यों नहीं?

मथुरा कांड के बाद मीडिया ने अचानक ऐसा माहौल बना दिया कि हेमामालिनी को वहां होना चाहिए। लेकिन हेमा ने पूछा है कि मुझे वहां होना चाहिए, लेकिन क्या कानून-व्यवस्था मेरी जिम्मेदारी है। जिसकी जिम्मेदारी है, उससे मीडिया कोई सवाल क्यों नहीं पूछ रहा है?

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या राज्य सरकार का कोई भी बड़ा जिम्मेदार मथुरा नहीं पहुंचा, लेकिन हेमामालिनी ने दूसरे ही दिन वहां पहुंचकर घायलों और शहीद पुलिसवालों के परिवारों से मुलाकात भी की। इन तस्वीरों को किसी भी टीवी चैनल ने नहीं दिखाया।

रात में मामले की सीबीआई जांच और शहीदों को एक करोड़ मुआवजे की मांग करते हुए एक धरने में भी हिस्सा लिया। यह सवाल उठता है कि मीडिया ने किसके इशारे पर हेमामालिनी को पूरे मामले का विलेन बना दिया।

शिवपाल यादव का नाम लेने में डर क्यों?

यह बात सामने आ चुकी है कि रामवृक्ष यादव के गिरोह को मुलायम के भाई और अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव का समर्थन हासिल था। यह आरोप भी है कि उन्हीं की वजह से प्रशासन लगातार इस मामले में नरमी बरत रहा था। लेकिन मीडिया ने शिवपाल यादव का अगर नाम लिया भी तो सिर्फ रस्मअदायगी के लिए।

दादरी कांड के वक्त भी यही हुआ था

दादरी कांड के वक्त भी मीडिया ने कुछ ऐसा ही रोल निभाया था। उस वक्त भी मामला कानून और व्यवस्था का था। लेकिन दिल्ली की मीडिया ने पूरे मामले में बीजेपी और केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। मथुरा के मामले में भी कोशिश कुछ ऐसी ही थी। लेकिन आरोपी रामवृक्ष यादव से मुलायम परिवार के करीबी रिश्तों के खुलासे से मीडिया को इस केस में ज्यादा खिलवाड़ करने का मौका नहीं मिल पाया।

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