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इंसाफ के लिए इंतज़ार करो, मी लॉर्ड छुट्टी पर हैं!

देश में गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं, लेकिन सरकारें काम कर रही हैं। दफ्तरों में अफसर से लेकर चपरासी तक सुबह से शाम तक काम कर रहे हैं। भयानक गर्मी के बावजूद पुलिस सड़कों पर और फौजी बॉर्डर पर मुस्तैद हैं। छोटे बच्चों के स्कूलों में गर्मी की छुट्टी जरूर है, लेकिन उनके भी टीचरों को रोज स्कूल जाना ही पड़ता है। लेकिन देश का सुप्रीम कोर्ट डेढ़ महीने की छुट्टी पर है। सुप्रीम कोर्ट के कैलेंडर के मुताबिक 16 मई से शुरू हुई यह छुट्टी 28 जून तक चलेगी।

जज ही नहीं वकील भी छुट्टी पर

वैसे तो वकेशन कोर्ट चल रही हैं, लेकिन इनमें भी कोई कामकाज नहीं हो रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक वकेशन कोर्ट में कुछ गिने-चुने मामले ही निपटाए जा रहे हैं। बुधवार को कोर्ट में सिर्फ 5 ताजा मामलों पर सुनवाई हो पाई। ज्यादातर दिनों में औसतन 6-7 केस ही सुने जा रहे हैं। वजह यह है कि जजों की तरह ज्यादातर बड़े वकील भी विदेशों में छुट्टी मना रहे हैं। ज़ाहिर है मुवक्किल नहीं चाहते कि जूनियर वकील उनके केस की पैरवी करें। ऐसे में पुराने मामलों की सुनवाई भी लटकी हुई है।

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पर उपदेश कुशल बहुतेरे

अदालतें खुद भले ही साल में इतनी छुट्टियां लेती हों, लोगों को इंसाफ के लिए कई-कई साल इंतजार करना पड़ता हो, लेकिन अदालतों के अजीबोगरीब फरमानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक दिन पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस को पिज़ा डिलिवरी ब्वॉय की तरह तय समय में मौके पर पहुंच जाना चाहिए। अदालत की यह सलाह बिल्कुल ठीक है, लेकिन शायद ऐसा कहते हुए जज साहब भूल गए कि जिस तरह से अदालतों में जजों की भारी कमी है उसी तरह पुलिस बल में भी हजारों पद खाली हैं। पुलिस अपराध को ज्यादा असरदार तरीके से तभी रोक सकती है जब अदालतें अपराधी को एक तय समय में सज़ा सुनाएं।

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