इशरत जहां केस की फाइल किसने गायब कराई?

आतंकवादी इशरत जहां को बेकसूर साबित करने की साज़िश के पीछे किसका दिमाग था? लगता है यह सवाल राज़ बनकर रह जाएगा। गृह मंत्रालय से इशरत जहां के केस से जुड़े एक बेहद अहम सीक्रेट फाइल गायब है। यह वही फाइल है, जिसमें उस वक्त के गृह मंत्री पी चिदंबरम की वो नोटिंग है, जो उन्होंने इशरत केस के हलफनामे पर लिखी थीं। फाइल को ढूंढ़ने के लिए बीके प्रसाद की अगुवाई में एक कमेटी बनाई गई थी, जो 31 मई यानी आज आखिरी तारीख तक फाइल का पता नहीं लगा पाई। अब खबर है कि कमेटी को 2 महीने का एक्सटेंशन दिया गया है।

इशरत केस में बेहद अहम कड़ी है गायब फाइल

गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह लगभग पक्का है कि फाइलों को जानबूझकर गायब कराया गया है। क्योंकि इतनी संवेदनशील फाइल इस तरह से कभी लापता नहीं होती। फाइल ढूंढने के लिए बनी कमेटी ने करीब 2 दर्जन अफसरों से पूछताछ की है, जिनके हाथ से होकर यह फाइल गुजरी थी। कमेटी ने होम मिनिस्ट्री के रिकॉर्ड रूम के अलावा कई अफसरों के कमरों तक की छानबीन करवाई। अब हर तरफ से नाकामी मिलने के बाद आगे का फैसला गृहमंत्री राजनाथ सिंह या गृह सचिव राजीव महर्षि ले सकते हैं। कुछ जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम की भूमिका सवालों में

चूंकि इन फाइलों से चिदंबरम के ही फंसने का खतरा था, लिहाजा शक उन्हीं पर जताया जा रहा है। जब इस बारे में आज जब पी चिदंबरम से पूछा गया तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कह दिया कि “मुझे भी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कुछ फाइलें गायब क्यों हैं।” मई 2014 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले मंत्रालयों में कई फाइलें जलाए जाने की खबरें आई थीं। यह अटकलें भी हैं कि हो सकता है कि कुछ इसी तरह से वो अहम फाइल नष्ट कर दी गई हो। ताकि सच्चाई कभी सामने आने ही न पाए।

पूर्व गृह सचिव ने बताया था चिदंबरम का रोल

उस वक्त गृह सचिव रहे जीके पिल्लई ने पिछले दिनों खुलासा किया था कि कैसे यूपीए सरकार के बड़े मंत्रियों ने एफिडेविट में बदलाव करवाकर इशरत जहां को बेकसूर करार दिया था। पिल्लई ने बताया कि इशरत जहां एनकाउंटर के एफिडेविट में चिदंबरम ने उन्हें दरकिनार करते हुए खुद बदलाव करवाया था। चिदंबरम ने आईबी में मेरे जूनियर अधिकारियों को बुलाया और एफिडेविट को पूरी तरह बदल दिया। वे खुद बोल कर नया एफिडेविट लिखवा रहे थे। इसलिए किसी ने कोई विरोध नहीं किया। इस नए एफिडेविट में लिखवाया गया था कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि इशरत आतंकवादी थी। बीजेपी आरोप लगाती रही है कि हलफनामे में इस बदलाव के पीछे पी. चिदंबरम ही नहीं कांग्रेस का आलाकमान भी शामिल था।

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