महाराष्ट्र के सूखे इलाकों में पानी बरसाएगा चीन!

चीन ने सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा इलाके में कृत्रिम बारिश कराने का प्रस्ताव दिया है। नकली बादलों से बारिश कराने के इस तरीके को क्लाउड सीडिंग टेक्नोलॉजी कहते हैं। चीन के मौसम वैज्ञानिकों की एक टीम इन दिनों मुंबई में है। यहां पर वो सूखे के पैटर्न पर स्टडी कर रहे हैं। चीन के वैज्ञानिकों ने स्थानीय अधिकारियों से बातचीत में प्रस्ताव दिया है कि वो मराठवाड़ा इलाके में कृत्रिम तरीके से बारिश करवा सकते हैं। अगर इस पर रजामंदी मिल गई तो देश में ऐसा पहली बार होगा जब कहीं पर नकली तरीके से बरसात करवाई जाएगी।

सीएम फड़नवीस से हो चुकी है बातचीत

मई महीने के ही शुरुआत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शंघाई क्षेत्र के सेक्रेटरी हान झेंग मुंबई के दौरे पर आए थे। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से उनकी मुलाकात में भी आर्टिफिशियल रेन टेक्नोलॉजी को लेकर बातचीत हुई थी। मुलाकात में हान झेंग ने क्लाउड सीडिंग टेक्नोलॉजी बिल्कुल मुफ्त देने का वादा किया था। यह ऑफर थोड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि आमतौर पर चीन दुनिया के किसी देश को टेक्नोलॉजी देने को आसानी से तैयार नहीं होता। हालांकि मराठवाड़ा में यह कितना सफल रहेगी, यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि बारिश कराने के लिए बादलों में सामान्य नमी का होना जरूरी होता है।

चीन ने दिखाए हैं क्लाउड सीडिंग के चमत्कार

चीन में 1958 में ही क्लाउड सीडिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू हो गया था। वहां के वैज्ञानिक सिर्फ बारिश करवाने ही नहीं, बारिश रुकवाने और कई बार किसी इलाके में बढ़े हुए प्रदूषण को कम करने के लिए भी इस टेक्नोलॉजी का जमकर इस्तेमाल करते रहे हैं। 2008 में बीजिंग ओलिंपिक के वक्त दुनिया ने इस टेक्नोलॉजी का कमाल देखा था, जब दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बीजिंग की आबोहवा देखते ही देखते एकदम साफ हो गई थी। पूरे ओलिंपिक के दौरान बीजिंग का पर्यावरण इतना साफ-सुथरा रहा था कि आसमान बिल्कुल नीला दिखाई देता था।

नकली बादल कई बार लाते हैं मुसीबत

क्लाउड सीडिंग में एक तरह से कुदरत से खिलवाड़ किया जाता है। अक्सर इसके बुरे असर भी देखने को मिलते हैं। 2009 में क्लाउड सीडिंग करते हुए कुछ चूक हो गई थी, जिसकी वजह से बीजिंग में भारी बेमौसम बर्फबारी हो गई थी। इसकी वजह से वहां पर ऐसी शीतलहर चली थी कि लोगों को कई दिनों तक घरों में बंद रहना पड़ा था।

चीन की राजधानी बीजिंग में 2009 में क्लाउड सीडिंग करते वक्त कुछ गड़बड़ी से अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई थी। इसकी वजह से कई दिनों तक बीजिंग का कुछ ऐसा हाल हो गया था। (फाइल फोटो)

चीन की राजधानी बीजिंग में 2009 में क्लाउड सीडिंग करते वक्त कुछ गड़बड़ी से अचानक भारी बर्फबारी शुरू हो गई थी। इसकी वजह से कई दिनों तक बीजिंग का कुछ ऐसा हाल हो गया था। (फाइल फोटो)

कैसे होती है क्लाउड सीडिंग?

बारिश करवाने के लिए आसमान में हवाई जहाज से बादलों पर कुछ केमिकल्स का छिड़काव किया जाता है। इससे बादलों की नमी बारिश का रूप ले लेती है और पानी बरसने लगता है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केमिकल इंसानों के लिए ठीक नहीं होता। इससे हवा, जमीन और पानी में प्रदूषण फैलता है।

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