काले धन के ‘स्वर्ग’ में खुद जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी!

विदेशों में जमा देश का काला धन वापस लाने की सरकार की कोशिशों का अहम दौर शुरू होने वाला है। खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने स्विट्जरलैंड जा सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के मुताबिक मोदी अमेरिका से लौटते वक्त कुछ वक्त के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में रुक सकते हैं। पीएम स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति से इस बारे में सीधे तौर पर बात करना चाहते हैं कि वो अपने बैंकों में जमा भारतीयों की ब्लैकमनी की जानकारी दें। फिलहाल अभी इस प्रोग्राम की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड को दुनिया भर में ‘काले धन का स्वर्ग’ कहा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत के कई नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के अवैध खाते स्विस एकाउंट्स में हैं। इन खातों में भारत के अरबों रुपये जमा हैं।

ब्लैकमनी पर बढ़ेगा सरकार का फोकस

अखबार के मुताबिक मोदी सरकार ने एक फॉर्मूला तैयार किया है, जिसके तहत स्विट्जरलैंड अपने बैंकों में जमा काले धन का पूरा ब्योरा भारत को दे देगा। अभी तक वहां की सरकार इससे इनकार करती रही है। हालांकि स्विट्जरलैंड दुनिया के कई दूसरे देशों को ये जानकारी दे चुका है। इनमें कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय यूनियन के देश शामिल हैं। वैसे मोदी स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति से इस साल के शुरू में वॉशिंगटन में हुए न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट में मिल चुके हैं। तब भी यह बात सामने आई थी कि पीएम मोदी ने उनसे ब्लैकमनी खातों के बारे में औपचारिक तौर पर जानकारी मांगी है। इसके अलावा जनवरी में वित्तमंत्री अरुण जेटली भी स्विट्जरलैंड गए थे। इस यात्रा में दोनों देशों के बीच काले धन पर समझौते का खाका तैयार हुआ है।

स्विट्जरलैंड के रुख़ में हुआ है बदलाव

स्विट्जरलैंड सरकार अब तक ब्लैकमनी के सवाल पर भारत से सिर्फ इनकार में बात करती रही है। लेकिन नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद पहली बार स्विट्जरलैंड के रुख में भी बदलाव दिखा। अक्टूबर 2014 में वहां की सरकार इस बात पर सहमत हुई थी कि अगर स्विस बैंकों में ब्लैकमनी जमा करने के बारे में भारत कोई नई और अतिरिक्त जानकारी मुहैया कराएगा तो वह इस पर सहयोग करेगी। दोनों देशों के बीच यह संधि अब भी लागू है।

ब्लैक मनी के दूसरे अड्डों से भी समझौते

स्विट्जरलैंड से अगर ब्लैकमनी पर डील हो जाती है तो यह एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी होगी। हालांकि बीते दो साल में मोदी सरकार ने कई दूसरे टैक्स हेवेन देशों के साथ समझौते किए हैं। हाल ही में मॉरीशस के साथ टैक्स समझौते में बदलावों पर दस्तखत हुए हैं। इससे कई कंपनियों के काले खातों का हिसाब भारत को मिलने में मदद हो रही है।

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