ममता को मिलाकर अब देश में 5 पीएम इन वेटिंग!

बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के साथ ही देश में पीएम पद का सपना देखने वालों की संख्या 5 हो गई है। ममता बनर्जी भले ही खुद प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी के बारे में पूछे गए सवालों को टाल रही हैं, लेकिन उनकी पार्टी के दूसरे नेता खुलकर कह रहे हैं कि 2019 में प्रधानमंत्री के पद के लिए उनका दावा सबसे मजबूत है। एक नज़र पीएम पद के सभी दावेदारों की खूबियों और खामियों पर।

1. ममता बनर्जी

पीएम इन वेटिंग क्लब में नई एंट्री हैं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। वैसे तो दीदी खुद को हमेशा इस पद के लिए बहुत छोटी नेता बताती हैं, लेकिन उनके करीबी दीदी की महत्वाकांक्षाओं को आवाज देने में कभी पीछे नहीं रहते। तृणमूल के नेता डेरेक ओ-ब्रायन और अमित मित्रा खुलकर कह रहे हैं कि ममता दीदी अब नेशनल लीडर हैं और वो किसी भी गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेसी तीसरे मोर्चे या चौथे मोर्चे में शामिल हो सकती हैं।

प्लस प्वाइंट: ममता की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्हें देश भर में पहचाना जाता है। उनकी सादगी भरी लाइफस्टाइल आम लोगों को पसंद आती है।
माइनस प्वाइंट: ममता की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी तुनकमिजाजी है। राजनीति में उनके दोस्तों से ज्यादा संख्या दुश्मनों की है। उनकी पार्टी के तमाम नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं।

2. नीतीश कुमार

बिहार के सीएम नीतीश कुमार खुद को पीएम पद का स्वाभाविक दावेदार मानते हैं। प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी महत्वाकांक्षा की वजह से ही उन्होंने बिहार में बीजेपी के साथ अपना कामयाब गठजोड़ तोड़ लिया था। इसीलिए उन्हें जलन और ईर्ष्या से भरे राजनेता के तौर पर देखा जाता है। नीतीश ने पिछले दिनों बाकायदा पीएम पद के लिए अपना राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है।

प्लस प्वाइंट: एक नेता के तौर पर बेदाग छवि है। किसी संभावित गठबंधन में उनके सर्वमान्य होने की संभावना अधिक है।
माइनस प्वाइंट: एक मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार का दूसरा कार्यकाल सफल नहीं माना जा रहा है। उनके पास देश की जनता को दिखाने के लिए कोई मॉडल नहीं है। लालू यादव से दोस्ती।

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