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अखिलेश यादव नहीं, ये हैं यूपी के असली लाट साहब!

पिछले दिनों आलोक रंजन बाथरूम में फिसलने से घायल हो गए थे, तब उनका हाल पूछने मुख्यमंत्री अखिलेश उनके घर पहुंचे थे। (फाइल तस्वीर)

अगर आप सोचते हैं कि यूपी में अखिलेश यादव का रुतबा चलता है तो आप बिल्कुल गलत हैं। दरअसल यूपी के असली लाट साहब यहां के मुख्य सचिव आलोक रंजन हैं। चीफ सेक्रेटरी साहब की तुनकमिजाजी और हिटलरशाही की कहानियां आजकल हर किसी की जुबान पर हैं। हालत ये है कि ब्यूरोक्रेसी से पुलिस महकमे तक उनका खौफ छाया रहता है।

घर से हार चोरी हुआ एसएसपी को ट्रांसफर किया

पिछले दिनों यह खबर आई थी कि आलोक रंजन के बेटे की शादी में एक हार चोरी हो गया। इसके बाद चीफ सेक्रेटरी साहब ने अपने दो सरकारी नौकरों को पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने इन दोनों नौकरों को 2 महीने तक गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखकर टॉर्चर किया। यहां तक कि दोनों का लाइ-डिटेक्टर टेस्ट भी कराया गया। लेकिन हार नहीं मिला। नाराज चीफ सेक्रेटरी साहब के आदेश पर लखनऊ के एसएसपी का ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में सीएम ने दखल देते हुए दोनों नौकरों को हिरासत से छुड़वा दिया। लेकिन चीफ सेक्रेटरी साहब अब भी नहीं माने। उन्होंने एक नौकर पर शराब पीने का आरोप लगाकर सस्पेंड करवा दिया। यह बात भी सामने आई थी कि मुख्य सचिव का परिवार चाहता था कि तोहफे में मिले उस हार की कीमत के बराबर पैसे पुलिस उन्हें चुकाए। आरोप है कि यह हार एक नामी बिल्डर ने तोहफे में दिया था।

जाम में फंसे तो पुलिसवालों को सस्पेंड कराया

इसी महीने आलोक रंजन बनारस के दौरे पर गए थे। वहां पर कैंट रोडवेज के पास उनका काफिला ट्रैफिक जाम में फंस गया। ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों को जाम खुलवाने और मुख्य सचिव की गाड़ी निकलवाने में कुछ मिनट का टाइम लग गया। इससे आलोक रंजन इस कदर भड़क गए कि उन्होंने 12 मामूली पुलिसवालों को सस्पेंड करवा दिया। आलोक रंजन के कहने पर चौकी प्रभारी, एक टीएसआई और 10 सिपाहियों को बिना कोई जांच बिठाए फौरन सस्पेंड कर दिया गया।

इन सारे विवादों के बीच चीफ सेक्रेटरी आलोक रंजन रिटायरमेंट के बाद भी अपना कार्यकाल बढ़वाने की कोशिश में हैं। इसे कोर्ट में चुनौती भी दी गई है।

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