Loose Top

केजरीवाल जी अब ज़रा अगस्ता की भी बात कर लें?

इसे अरविंद केजरीवाल की कामयाबी ही कहेंगे कि बीते 2 दिन से देश की सबसे बड़ी खबर पीएम मोदी की डिग्री है। केजरीवाल ने अपने एक दांव से सारा ध्यान अगस्ता हेलीकॉप्टर सौदे में सोनिया गांधी और अपने कुछ करीबी पत्रकारों पर दलाली खाने के आरोपों से हटा दिया। मीडिया तो इसके लिए पहले से तैयार ही बैठी थी। इस सारे हंगामे के बीच सौदे के बिचौलियों और गांधी परिवार के बीच करीबी रिश्तों की बात सामने आई है।यह बात पता चली है कि क्रिश्चियन मिशेल और उसके पिता वॉल्फगॉन्ग मिशेल इंदिरा के जमाने से गांधी परिवार के साथ रिश्ते रहे हैं। जबकि गुइडो हाश्के राहुल गांधी के प्राइवेट सेक्रेटरी कनिष्क सिंह का करीबी है। कनिष्क सिंह रिएल एस्टेट कंपनी एम्मार एमजीएफ का मालिक भी है।

भारतीय ड्राइवर ने दीं कई अहम जानकारी

दरअसल ईडी भारत में क्रिश्चियन मिशेल के ड्राइवर नारायण बहादुर को हिरासत में लेकर पिछले कुछ दिनों से पूछताछ कर रही है। ड्राइवर ने जो बातें बताई हैं वो चौंकाने वाली हैं। ड्राइवर ने उस ब्रिटिश नागरिक और उसके संपर्कों के बारे में भी तफसील से बताया है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसने हेलीकॉप्टर खरीद सौदे में कांग्रेस के नेताओं तक दलाली की रकम पहुंचाने में अहम किरदार अदा किया था।

हथियारों की दलाली का खानदानी धंधा

क्रिश्चियन मिशेल का पिता वॉल्फगॉन्ग 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते होने वाले हथियार सौदों में बिचौलिए का काम करता था। वो अक्सर दिल्ली आता-जाता रहता था। उसके इंदिरा गांधी, राजीव और सोनिया तीनों से मिलना-जुलना था। तब एयरबस, डेसॉल्ट के सौदों के अलावा ब्रिटिश कंपनियों के भारत में कारोबार में वो दलाल काम करता था। अगस्त 2012 में उसकी मौत हो गई थी। मरने से पहले 90 के दशक में ही उसने अपना दलाली का सारा धंधा बेटे क्रिश्चियन मिशेल को सौंप दिया था। द पायनियर अखबार ने इस बारे में 2013 में 2 रिपोर्ट्स छापी थीं। ड्राइवर ने भी इसी को दोहराया है।

बिचौलिए ने सोनिया से गद्दारी भी की थी!

90 के दशक में जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री थे तब वॉल्फगॉन्ग मिशेल तब के प्रधानमंत्री नरसिंह राव का खबरी बन गया था। वो सोनिया गांधी की लंदन यात्राओं के बारे में नरसिंह राव को बताया करता था कि वो कहां गईं और किससे मिलीं।

राहुल के करीबी का करीबी बिचौलिया हाश्के

दूसरा बिचौलिया गुइडो हाश्के 2009 में एम्मार एमजीएफ का डायरेक्टर बन गया था। यहां सवाल उठता है कि एक स्विस नागरिक भारत में एक कंपनी का डायरेक्टर कैसे बन गया? एम्मार एमजीएफ कंपनी को कनिष्क सिंह के नाना वेदप्रकाश शर्मा ने 60 के दशक में शुरू किया था। कनिष्क के मामा राजीव गुप्ता अभी भी कंपनी के हेड हैं। जब यह बात सामने आई तो एम्मार एमजीएफ ने फौरन एक प्रेस रिलीज जारी करके सफाई दे दी कि हाश्के सिर्फ कुछ महीनों के लिए डायरेक्टर बना था और कंपनी का कनिष्क सिंह से कोई कारोबारी लेना-देना नहीं है।

एम्मार एमजीएफ पर मेहरबान रही सरकार

कॉमनवेल्थ घोटाले में मिले ठेकों में सबसे बड़ा हिस्सा इसी कंपनी को मिला था। पूरा कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज इसी कंपनी ने बनाया था। कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी तभी यूपीए के दौर में ही सबसे पहले एम्मार एमजीएफ को क्लीन चिट दिला दी गई। उस वक्त मीडिया भी कॉमनवेल्थ घोटाले की खबरों में एम्मार एमजीएफ का नाम खुलकर लेने से बचा करती थी।
(इस खबर में वेबसाइट pgurus.com से इनपुट्स लिए गए हैं)

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या कांग्रेस का घोषणापत्र देश विरोधी है?

View Results

Loading ... Loading ...