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इन दो पत्रकारों ने केजरीवाल को दूसरी बार फंसवाया

फर्जी डिग्री विवाद में झूठा साबित होने के बाद से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की चौतरफा फजीहत हो रही है। केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि मुद्दा चुनने में उनसे चूक हुई है। लेकिन आम आदमी पार्टी के अंदरखाने में इस पूरे मामले पर नाराजगी झलकने लगी है। पार्टी के एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इस सारे गड़बड़झाले के पीछे 2 पूर्व पत्रकारों आशुतोष और दीपक बाजपेयी का हाथ है। इससे पहले डीडीसीए मामले में भी इन्हीं दोनों की वजह से केजरीवाल मुश्किल में फंसे हैं।

फर्जी डिग्री मामला आशुतोष के दिमाग की उपज

हमारे सूत्र ने बताया कि आशुतोष पिछले कुछ वक्त से इस बारे में लगातार केजरीवाल से बात कर रहे थे। उनका कहना था कि सही मौका आने पर यह मुद्दा पूरे जोरशोर से उठाना चाहिए। केजरीवाल ने उनसे कहा कि वो पहले जांच करवा लें। आशुतोष ने डिग्री की जांच का जिम्मा अपने भरोसेमंद दीपक वाजपेयी को सौंपा। दीपक वाजपेयी आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन सेल का जिम्मा संभालते हैं। पिछले महीने बाजपेयी ने खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी जाकर पीएम की डिग्री निकलवाने की कोशिश की थी। लेकिन उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली। दीपक वाजपेयी ने इसे शक की वजह मान लिया। जबकि सच्चाई यह है कि 20 साल से पुरानी डिग्रियों के मामले में यूनिवर्सिटी किसी थर्ड पार्टी का आवेदन स्वीकार नहीं करती। यह बात उन्हें बताई गई थी, लेकिन दीपक वाजपेयी और आशुतोष ने यह दलील मानने से मना कर दिया था।

डीडीसीए मामले में करवा चुके हैं फजीहत

इससे पहले दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) मामले में भी दीपक वाजपेयी और राघव चड्ढा की तहकीकात के दम पर केजरीवाल ने अरुण जेटली पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए थे। आखिर में तंग आकर जेटली ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोंक दिया। अब वो मामला कोर्ट में चल रहा है। केस की तफसील में जाएं तो पहली ही नजर में जेटली पर लगाए गए ज्यादातर आरोप गलत और बनावटी मालूम होते हैं।

आशुतोष और बाजपेयी के खिलाफ नाराजगी

आम आदमी पार्टी के कई जिम्मेदार नेता आशुतोष और दीपक बाजपेपी को बहुत भाव दिए जाने से नाखुश हैं। हालांकि वो खुलकर ऐसा नहीं कह पाते क्योंकि आम आदमी पार्टी में आमतौर पर तब तक कोई अपनी निजी राय नहीं जताता, जब तक अरविंद केजरीवाल खुद उसे इसकी इजाज़त न दें। बिना पूछे किसी फैसले पर नाराजगी जताने वाले को बागी या बीजेपी का एजेंट कह दिया जाता है। बीते एक साल में इस तरह से कई नेताओं और वॉलेंटियर्स को केजरीवाल अलग राय रखने पर बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।

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