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लेफ्ट आतंक का जीता-जागता सबूत मास्टर सदानंदन

दिल्ली में वामपंथी संगठन देश भर में मानवाधिकार और लोकतंत्र की बातें करते हैं, लेकिन उनका असली चेहरा कम ही सामने आ पाता है। केरल में अपनी रैली में पीएम मोदी ने कन्नूर की एक विधानसभा सीट से उम्मीदवार सदानंदन मास्टर से मिलवाया, जिनके दोनों पैर सीपीएम के लोगों ने काट दिए थे। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठी मीडिया कभी भी मास्टर सदानंदन की कहानी नहीं बताती, क्योंकि मीडिया में वामपंथी विचारधारा वाले घुसे हुए हैं।

मीडिया पर पीएम मोदी की सख्त टिप्पणी

क्या है मास्टर सदानंदन की कहानी

केरल के कन्नूर में मास्टर सदानंदन आरएसएस के सदस्य के तौर पर काम कर रहे थे। वो एक स्कूल में टीचर का काम भी करते थे। आरएसएस में शामिल होने से पहले वो भी सीपीएम के सदस्य थे, लेकिन जब उन्होंने वामपंथी दलों का असली चेहरा देखा तो उन्होंने सीपीएम छोड़ दी। जनवरी 1994 में सजा के तौर पर सीपीएम के सदस्यों ने उन्हें घेर कर उनके दोनों पैर तलवार से काट दिए थे। वो काफी देर तक सड़क पर ही खून से लथपथ पड़े रहे थे। 15 मिनट बाद आई पुलिस ने उन्हें मरा हुआ समझकर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि उनकी जान बच गई। उस वक्त इतनी बर्बर घटना के बावजूद दिल्ली के किसी अखबार ने उनकी छोटी सी खबर भी नहीं छापी थी। यहां तक कि केरल के लोकल मीडिया में भी तब यह खबर 1-2 लाइन से ज्यादा नहीं छपी। बाद में जब मामला सामने आया था तो दिल्ली के कई बड़े पत्रकारों ने पैर काटे जाने की घटना को जायज भी ठहराया था। मास्टर सदानंदन आज भी त्रिशूर जिले के पेरामंगलम में श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में टीचर हैं। वो कृत्रिम पैरों पर चलते हैं और बेहद सादगी भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मास्टर सदानंदन ने हाल ही में एक लोकल अखबार से कहा है कि यह चुनाव मेरे लिए 22 साल पहले हुए अत्याचार का हिसाब बराबर करने की तरह है। मैं चुनाव जीतूं या हारूं, लेकिन मैं हमेशा वामपंथ के असली चेहरे को उजागर करने का काम करता रहूंगा।

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