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क्या इन ‘अगस्ता पत्रकारों’ को मिला है मोटा माल?

अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाले में यह बात सामने आई है कि 45 करोड़ रुपये भारतीय मीडिया को मुंह बंद रखने के लिए दिए गए। यह बात उजागर होने के बाद से लगातार अटकलें लगती रही हैं कि वो कौन से पत्रकार या मीडिया हाउस हैं, जिनको यह रकम मिली है। इस मामले पर लगातार अहम जानकारियां सामने लाने वाली वेबसाइट pgurus.com ने अखबारों, चैनलों और पत्रकारों की पुरानी खबरों के हिसाब से अंदाज लगाने की कोशिश की है कि वो कौन से लोग थे जिन्होंने इस घोटाले पर या तो चुप्पी साध रखी थी या फिर वो झूठी खबरें प्लांट करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए साल 2012-13 की खबरों की पड़ताल की गई। यही वो वक्त था जब पहली बार घोटाले का मामला सामने आया था।

2 अखबारों को छोड़ बाकी मीडिया के मुंह बंद थे!

ये दो अखबार थे इंडियन एक्सप्रेस और द पायनियर। तब इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर मनु पब्बी ने सबसे पहले फरवरी 2012 में इस घोटाले की पोल खोली थी। उनकी लिखी कई रिपोर्ट्स इंडियन एक्सप्रेस में छपीं। पायनियर ने इसके तार सोनिया गांधी से जुड़े होने का शक जताया था। अगस्ता के अलावा बोली लगाने वाली कंपनियों सिकोर्स्की और यूरोकॉप्टर ने रक्षा मंत्रालय से सौदे में धांधली की शिकायत भी की और इसकी चिट्ठी मीडिया में भी जारी की। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस और पायनियर के अलावा किसी अखबार या चैनल ने इसे नहीं छापा। टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स (तब वीर सांघवी संपादक थे), द हिंदू, इंडिया टुडे, एनडीटीवी, सीएनएन-आईबीएन, टाइम्स नाऊ ने अगस्ता घोटाले पर पूरी तरह मुंह बंद रखा।

cnn-ibn-tamratings-313राजदीप सरदेसाई का सीएनएन-आईबीएन

उस वक्त राजदीप सरदेसाई सीएनएन-आईबीएन के साथ थे। उन्होंने एक प्रोग्राम किया था जिसमें अगस्ता पर इंडियन एक्सप्रेस के दावों पर सवाल उठाए गए थे। इस प्रोग्राम में इस दावे को खारिज करने की कोशिश की गई कि डील में कोई घोटाला हुआ है।

 

राजदीप सरदेसाई की खुद की भूमिका भी संदिग्ध

lJvWCh_v_400x400फरवरी 2013 में जब अगस्ता घूसखोरी मामले का इटली में भंडाफोड़ हुआ तो राजदीप सरदेसाई ने संजीव त्यागी उर्फ जूली त्यागी का इंटरव्यू सीएनएन-आईबीएन पर किया। संजीव त्यागी घोटाले के आरोपी पूर्व एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी के परिवार का सदस्य है। जूली त्यागी से ऐसे-ऐसे सवाल पूछे गए, जिनके जवाब वो आसानी से दे कर खुद को बेगुनाह दिखा सके। अब जब राजदीप सरदेसाई इडिया टुडे टीवी में आ चुके हैं उन्होंने एक बार फिर से जूली त्यागी का इंटरव्यू किया। पूरे इंटरव्यू में राजदीप ने त्यागी से एक भी ऐसा सवाल नहीं पूछा जिसका जवाब देना उसके लिए मुश्किल होता। अक्टूबर 2014 में जब इटी की ट्रायल कोर्ट ने हेलीकॉप्टर कंपनी के अधिकारियों को बरी कर दिया था तब भी एसपी त्यागी सीएनएन-आईबीएन और इंडिया टुडे टीवी पर प्रकट हुए और उन्होंने ऐसे दिखाने की कोशिश की जैसे कि उन्हें फंसाया गया था और वो पीड़ित हैं। हमारे सूत्रों के मुताबिक राजदीप से त्यागी परिवार की करीबी की एक बड़ी वजह एसपी त्यागी की बेटी है, जो नेटवर्क18 ग्रुप में ही राजदीप के साथ काम करती थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर भी सवालों में

5f026773-c117-49de-a054-3778eee6448830 जुलाई 2009 को टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर छपी थी, जिसमें रिपोर्टर ने डील से 7 महीने पहले ही बता दिया था कि रक्षा मंत्रालय अगस्ता के साथ डील फाइनल करने जा रहा है। सौदा फरवरी 2010 में फाइनल हुआ, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया को इसकी खबर 2009 में ही लग गई।

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डिफेंस ब्लॉग ‘त्रिशूल’ को भी पता था

डिफेंस सेक्टर के ब्लॉग ‘त्रिशूल’ ने भी 16 महीने पहले 6 अक्टूबर 2008 को ही बता दिया था कि अगस्ता वेस्टलैंड का नाम फाइनल होने जा रहा है। हैरत की बात ये है कि इनमें से किसी ने यह नहीं बताया कि अगस्ता के साथ इस सौदे में किस तरह रिश्वतखोरी चल रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि ये सारा उन 45 करोड़ रुपये का कमाल था, जो कथित तौर पर पत्रकारों में बांटे गए थे।

रक्षा पत्रकार अजय शुक्ला पर भी संदेह

M_Id_371913_FPरक्षा संवाददाता अजय शुक्ला ने फरवरी 2013 में दूरदर्शन में रहते हुए तब के वायुसेना प्रमुख एस पी त्यागी का इंटरव्यू किया था। उस इंटरव्यू में उन्होंने त्यागी को भरपूर मौका दिया ताकि वो इस सौदे में खुद पर लग रहे आरोपों पर खुद को बेकसूर बता सकें। आरोप लगते हैं कि कांग्रेस से करीबी के चलते अजय शुक्ला को डीडी न्यूज का कंसल्टेंट बनाया गया था। सेना में कर्नल रह चुके अजय शुक्ला एनडीटीवी में रह चुके हैं। वहां पर उन्होंने इराक और अफगानिस्तान के युद्ध वाले इलाकों में बेहतरीन रिपोर्टिंग की थी।

 

हिंदुस्तान टाइम्स ने खुलकर डील का बचाव कियाht-logo-c8ae6f3a428cd83124b248ee05a423bf

हिंदुस्तान टाइम्स और उनके बिजनेस अखबार मिंट ने तो पूरे समर्पण के साथ अगस्ता सौदे में यूपीए सरकार और खासतौर पर सोनिया गांधी का बचाव किया। 2010 से 2013 के बीच इन दोनों अखबारों ने अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में कई पीआर स्टोरी छापी हैं। यहां तक कि अब भी हिंदुस्तान टाइम्स लगातार ऐसी खबरें छाप रहा है जो सौदे में उसकी भूमिका को शक के दायरे में लाती हैं।

इंडियन एक्सप्रेस भी पाक-साफ नहीं!

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की परतें खोलने वाला इंडियन एक्सप्रेस अखबार खुद भी सवालों में है। संपादक शेखर गुप्ता के साथ-साथ रिपोर्टर मनु पब्बी ने 2014 में जून-जुलाई के आसपास इंडियन एक्सप्रेस छोड़ दिया था। कहा गया था कि उनका अखबार के मैनेजमेंट से कुछ विवाद हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस हर साल पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड देता है। 2012-13 में यह अवॉर्ड मनु पब्बी को मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं दिया गया। इसके पीछे एक्सप्रेस मैनेजमेंट की क्या मंशा थी यह वही सही-सही बता सकते हैं।

इस बीच, डॉक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी खुलकर कह रहे हैं कि दलाली खाने वाले पत्रकारों की भी पहचान होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। डॉक्टर स्वामी ने आज सुबह ट्वीट करके बताया है कि एक आरोपी पत्रकार से पूछताछ होने वाली है।

बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल ने मार्च 2010 से दिसंबर 2011 के बीच भारतीय मीडिया को ‘मैनेज’ करने की नीयत से 45 करोड़ रुपये खर्च किए थे। हालांकि इस डील की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी थी। 2006 के बाद से ही ऐसी हेराफेरी की जा रही थी ताकि सौदा अगस्ता के पक्ष में जाए। 45 करोड़ रुपये की रकम फरवरी 2010 में हेलीकॉप्टर की डील के एक महीने बाद कंपनी की तरफ से भेजी गई थी।

(इस रिपोर्ट में दिए गए ज्यादातर तथ्य वेबसाइट pgurus.com से साभार लिए गए हैं। न्यूज़लूज़.कॉम स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं करता है।)

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