मोदी की डिग्री मिली, सोनिया राहुल की कब मिलेगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एमए में फर्स्ट क्लास पास होने के सबूत सामने आ गए हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की शैक्षिक योग्यता पर सस्पेंस बना हुआ है। सोनिया और राहुल दोनों की ही पढ़ाई-लिखाई को लेकर काफी पहले से विवाद रहा है। हालांकि मेनस्ट्रीम मीडिया की हिम्मत कभी इस पर खुलकर बात करने की नहीं रही। सोशल मीडिया पर यह सवाल पूछा जा रहा है कि सोनिया और राहुल कब इस बात के सबूत दिखाएंगे कि वो कितने पढ़े-लिखे हैं। बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी यह मुद्दा काफी समय से उठाते रहे हैं।

सोनिया गांधी 5वीं पास भी नहीं हैं!

सोनिया गांधी पर अपनी पढ़ाई-लिखाई के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगता रहा है। सोनिया ने पहले दावा किया था कि उन्होंने ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया है। सुब्रह्मण्यन स्वामी ने इसकी पड़ताल की और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी को इस बारे में लेटर लिखा। यूनिवर्सिटी ने उन्हें लिखित जवाब भेजा कि सोनिया गांधी या एंतोनिया माइनो (पुराने नाम) के यूनिवर्सिटी में कभी भी किसी कोर्स में पढ़े होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। स्वामी ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। उनका दावा है कि सोनिया 5वीं क्लास भी पास नहीं हैं। विकीपीडिया के मुताबिक सोनिया गांधी ने 1964 में कैंब्रिज सिटी (यूनिवर्सिटी नहीं) के बेल एजुकेशनल ट्रस्ट नाम की किसी कोचिंग क्लास में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स किया था। 1965 में वो कैंब्रिज के यूनिवर्सिटी रेस्टोरेंट में काम करने लगीं, जहां उनकी राजीव गांधी से मुलाकात हुई थी, जो उन दिनों ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ते थे।

राहुल गांधी के एमफिल में भी फर्जीवाड़ा!

मां सोनिया की तरह राहुल गांधी पर भी अपनी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के बारे में झूठ बोलने का आरोप है। अपने चुनावी हलफनामे में राहुल ने 1995 में यूके की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एमफिल (डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स) करने का दावा किया था। कथित तौर पर यूनिवर्सिटी से जारी एक सर्टिफिकेट भी सामने आया। 2008 में जारी इस सर्टिफिकेट के मुताबिक राहुल ने 2004-05 में कोर्स किया। सर्टिफिकेट में कोर्स का नाम गलत लिखा है। असल में इस कोर्स का नाम एफफिल (डेवलपमेंट स्टडीज) है। लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात है वो ये कि राहुल गांधी का नाम राउल विंसी (Rahul Vinci) के तौर पर दर्ज है। हालांकि कहा जाता है कि यह नकली नाम सुरक्षा कारणों से रखा गया था। सर्टिफिकेट में राहुल के जिन चार पेपर्स का जिक्र किया गया है, उनमें से तीन में वो मुश्किल से पास हुए हैं और एक में फेल हैं।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से मिला राहुल गांधी उर्फ राउल विंसी का कथित सर्टिफिकेट जिसमें उनके कोर्स का नाम गलत दर्ज है। इसके मुताबिक राहुल गांधी एक पेपर में फेल हो गए थे।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से मिला राहुल गांधी उर्फ राउल विंसी का कथित सर्टिफिकेट जिसमें उनके कोर्स का नाम गलत दर्ज है। इसके मुताबिक राहुल गांधी एक पेपर में फेल हो गए थे।

राहुल की ग्रेजुएशन डिग्री पर भी सवाल

राहुल गांधी के बारे में पहले कहा जाता रहा कि उन्होंने दुनिया की मशहूर हावर्ड यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री ली है। बाद में ये गलत साबित हुई थी। पता चला था कि उन्होंने अमेरिका के फ्लोरिडा में रॉलिन्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। अब वो इसे ही अपनी डिग्री बताते हैं। अमेरिका जाने से पहले 1989 में राहुल ने कुछ दिन दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में भी पढ़ाई की थी, यहां उन्होंने स्पोर्ट्स और ईसाई कोटा में दाखिला लिया था। सेंट स्टीफेंस कॉलेज के उस वक्त के कई छात्र दावा करते हैं कि हिंदी में फेल होने के बाद राहुल ने कॉलेज आना बंद कर दिया था। जबकि कांग्रेस के नेता यह दावा करते रहे हैं कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज सिक्योरिटी कारणों से छोड़ना पड़ा था।

हावर्ड यूनिवर्सिटी से निकाले गए थे राहुल?

सुब्रह्मण्यन स्वामी का दावा है कि राहुल गांधी ने हावर्ड यूनिवर्सिटी में डोनर्स कोटा के तहत एडमिशन लिया था। जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री थे तो हिंदुजा ग्रुप ने हावर्ड यूनिवर्सिटी को 1.1 करोड़ डॉलर डोनेशन दिया था। यूनिवर्सिटी के दाखिलों में डोनेशन देने वालों को कोटा मिलता है। राहुल को दाखिला तो मिल गया, लेकिन वो यूनिवर्सिटी में ज्यादा दिन टिक नहीं सके। तीन महीने में ही वो विश्वविद्यालय से बाहर हो गए। कुछ लोग कहते हैं कि राहुल को यूनिवर्सिटी से निकाला गया था, क्योंकि इंटरनल एग्जाम में वो फेल हो गए थे। कुछ लोग यह दावा करते हैं कि राजीव गांधी की हत्या की वजह से राहुल को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। अगर यह बात सही है तो फिर राहुल को यह कहने की क्या जरूरत थी कि उन्होंने हावर्ड से एमए (इकोनॉमिक्स) किया है।

राहुल गांधी की पढ़ाई के बारे में देखिए क्या कहते हैं सुब्रह्मण्यन स्वामी

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