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कश्मीर पर सब मुंह बंद ही रखें तो अच्छा

अरुण पांडेय नोएडा में ज़ी बिज़नेस में कार्यरत हैं।
अरुण पांडेय नोएडा में ज़ी बिज़नेस में कार्यरत हैं।
कश्मीर समस्या कैसे हल होगी… क्या इसका कोई गारंटीड सॉल्यूशन है किसी के पास। कांग्रेस के पास है… लेफ्ट के पास है… जनता दल के पास है… बीजेपी के पास भी नहीं है।  ठीक है तो इसमें इतना रोना-धोना क्यों किसी के पास नहीं है। लेकिन अगर कोई एक्सपेरिमेंट कर रहा है तो इससे आपको एतराज क्यों है??? बताओ बताओ।
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं तो करने दो, अब उनका चांस है, सफल नहीं रहा तो कोसने का धर्म आपसे कोई छीनने वाला नहीं। लेकिन किसी को चांस लेने से क्यों रोकते हो। जब गारंटीड सॉल्यूशन किसी के पास नहीं है तो। कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी पार्टियां यूं प्रलाप कर रही हैं जैसे उन्होंने कश्मीर समस्या हल कर दी थी और मोदी जी उसे बिगाड़ रहे हैं। अगर हल नहीं हुई तो कम से कम आप ये तो कह सकेंगे कि हम भी नही पाए थे और तुम भी नहीं कर पाए।
हुर्रियत को अगर किसी से मिलने मिलाने की छूट दी गई है तो इसमें बुरा क्या है, अगर पॉलिसी में कोई गलती लगी तो फॉर्मूला बदल कर देख लिया।
कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर, राजीव गांधी, नरसिम्हाराव और मनमोहन सिंह ने भी कुछ कोशिशें की समस्या जस की तस रही। मोरारजी देसाई, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, दैवेगोड़ा, इंदर कुमार गुजराल भी कोई श्योर फॉर्मूला नहीं निकाल पाए। वीपी सिंह के समय को तो कश्मीर में हिंसा और आतंक के दौर का कार्यकाल माना जाता है। लेकिन वो कुछ ठोस नहीं कर पाए।
अटल बिहारी वाजपेयी ने कुछ नए एक्सपेरिमेंट किए, ठीक है सफल नहीं हुए, करगिल हुआ फिर भी उन्होंने एक्सपेरिमेंट किया। इतना बड़ा जोखिम उठाकर मुशर्रफ को भारत बुलाया। ठीक है प्रयोग सफल नहीं हुआ लेकिन गुरु उस व्यक्ति की तारीफ तो करो जिसने इतना बड़ा जोखिम उठाया, कारगिल होने के बाद भी। अटल बिहारी वाजपेयी का दिल कितना बड़ा था ये तो सोचो असफलताओं की बातें सब करते हैं क्या उस दिलेरी उस दम को किसी ने देखा, कितने साहस का काम था मुशर्रफ को भारत बुलाना। सब खिलाफ थे आरएसएस, कांग्रेस, शिवसेना, विश्व हिंदू परिषद वगैरह।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पॉलिसी से एतराज हो सकता है, होना भी चाहिए लेकिन प्लीज कश्मीर पर एक्सपेरिमेंट करने से उन्हें मत रोकिए। देश की सफलता के लिए कश्मीर समस्या हल होना जरूरी है और इस दिशा में जितनी कोशिश की जाएं करने देनी चाहिए। या तो आपके पास कोई सॉल्यूशन है तो बताओ और ये भी बताओ कि हममें इसे लागू करने का साहस नहीं था, आप कर लो या फिर चुप हो जाओ। बाकी दूसरे सब मामलों में सरकार की जितनी आलोचना करनी है करो, लेकिन कश्मीर का शांतिपूर्ण समाधान निकलने दो।

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